एनबीएफसी के लिए आरबीआई ने कड़े किए प्रूडेंशियल नॉर्म्स
2026-05-19पृष्ठभूमि: गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) भारतीय वित्तीय प्रणाली में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, जो ऋण और वित्तीय सेवाएं प्रदान करती हैं। भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) लगातार एनबीएफसी पर नियामक निरीक्षण को मजबूत कर रहा है।
वर्तमान संदर्भ: वित्तीय स्थिरता को और मजबूत करने और बैंकों के साथ समान अवसर सुनिश्चित करने के प्रयास में, आरबीआई ने एनबीएफसी के लिए प्रूडेंशियल नॉर्म्स (विवेकपूर्ण मानदंडों) को बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है। इसमें सख्त पूंजी पर्याप्तता आवश्यकताएं, संशोधित परिसंपत्ति वर्गीकरण नियम और बढ़ी हुई प्रावधानिंग (प्रावधान) मानदंड शामिल हैं, विशेष रूप से बड़ी एनबीएफसी के लिए।
प्रभाव: इन उन्नत मानदंडों से एनबीएफसी की जोखिम प्रबंधन क्षमताओं में सुधार होने, प्रणालीगत जोखिम को कम करने और जमाकर्ताओं व निवेशकों की सुरक्षा होने की उम्मीद है। यह क्षेत्र के भीतर समेकन को भी प्रोत्साहित करेगा, जिससे मजबूत और अधिक लचीले वित्तीय संस्थान बनेंगे।
आरबीआई ने डिजिटल लेंडिंग के लिए नया ढांचा पेश किया
2026-05-19पृष्ठभूमि: डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्मों की तीव्र वृद्धि ने सुविधा प्रदान की है, लेकिन पारदर्शिता, डेटा गोपनीयता और निष्पक्ष ऋण प्रथाओं के बारे में चिंताएं भी बढ़ाई हैं। आरबीआई इस विकसित परिदृश्य की निगरानी कर रहा है।
वर्तमान संदर्भ: इन चिंताओं को दूर करने और उपभोक्ता संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए, आरबीआई ने डिजिटल लेंडिंग के लिए एक व्यापक ढांचा पेश किया है। यह ढांचा ऋण मूल्य निर्धारण में अधिक पारदर्शिता अनिवार्य करता है, अत्यधिक ब्याज दरों को प्रतिबंधित करता है, डेटा उपयोग के लिए स्पष्ट सहमति की आवश्यकता होती है, और एक स्पष्ट शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करता है। यह विनियमित संस्थाओं और आउटसोर्सिंग भागीदारों की भूमिका को भी परिभाषित करता है।
प्रभाव: नए ढांचे का उद्देश्य जिम्मेदार डिजिटल लेंडिंग को बढ़ावा देना, उधारकर्ताओं को शिकारी प्रथाओं से बचाना और डिजिटल लेंडिंग पारिस्थितिकी तंत्र में विश्वास बढ़ाना है। यह सुनिश्चित करेगा कि डिजिटल लेंडिंग गतिविधियां वित्तीय स्थिरता और उपभोक्ता संरक्षण के आरबीआई के उद्देश्यों के अनुरूप हों।