सरकार ने हरित कौशल और एआई पर केंद्रित पीएमकेवीवाई 4.0 लॉन्च किया
2026-10-13पृष्ठभूमि: प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय की एक प्रमुख कौशल विकास योजना है, जिसे 2015 में शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य बड़ी संख्या में भारतीय युवाओं को उद्योग-प्रासंगिक कौशल प्रशिक्षण प्रदान करना है। पिछले चरणों ने रोजगार क्षमता बढ़ाने के लिए विभिन्न क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया था। वर्तमान संदर्भ: 13 अक्टूबर, 2026 को, सरकार ने आधिकारिक तौर पर पीएमकेवीवाई 4.0 का शुभारंभ किया, जो भारत के कौशल पारिस्थितिकी तंत्र में एक महत्वपूर्ण विकास है। यह नया चरण विशेष रूप से हरित कौशल, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग और ड्रोन प्रौद्योगिकी जैसे उभरते क्षेत्रों को लक्षित करता है। इस पहल का लक्ष्य अगले दो वर्षों में 1.5 मिलियन से अधिक युवाओं को प्रशिक्षित करना है, जो भविष्य की औद्योगिक मांगों के अनुरूप है। प्रभाव: पीएमकेवीवाई 4.0 से महत्वपूर्ण भविष्य-उन्मुख उद्योगों में कौशल अंतर को पाटने की उम्मीद है, जिससे भारत का कार्यबल विश्व स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनेगा। यह युवाओं को उन्नत कौशल के साथ सशक्त करेगा, नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देगा, और हरित व डिजिटल अर्थव्यवस्थाओं में सतत आर्थिक विकास और रोजगार सृजन में योगदान देगा।
आवास मंत्रालय ने पीएमएवाई-यू प्रगति रिपोर्ट जारी की, शहरी आवास मील के पत्थर पर प्रकाश डाला
2026-10-13पृष्ठभूमि: प्रधानमंत्री आवास योजना - शहरी (पीएमएवाई-यू), जिसे 2015 में शुरू किया गया था, का लक्ष्य सभी पात्र शहरी परिवारों को पक्के घर सुनिश्चित करके "सभी के लिए आवास" प्रदान करना है। यह योजना विभिन्न वर्टिकल जैसे इन-सीटू स्लम पुनर्विकास, क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी योजना, साझेदारी में किफायती आवास और लाभार्थी-नेतृत्व निर्माण के माध्यम से संचालित होती है। वर्तमान संदर्भ: 13 अक्टूबर, 2026 को, आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने पीएमएवाई-यू के लिए अपनी नवीनतम प्रगति रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट में बताया गया कि 1.35 करोड़ से अधिक घरों को मंजूरी दी गई है, जिसमें से 1.10 करोड़ से अधिक घर पूरे हो चुके हैं और पूरे शहरी भारत में लाभार्थियों को सौंप दिए गए हैं। नई निर्माण प्रौद्योगिकियों और टिकाऊ प्रथाओं को अपनाने पर विशेष जोर दिया गया। प्रभाव: पीएमएवाई-यू के सफल कार्यान्वयन ने लाखों शहरी गरीबों की जीवन स्थितियों में काफी सुधार किया है, झुग्गी-झोपड़ी की आबादी को कम किया है और शहरी बुनियादी ढांचे को बढ़ाया है। इसने निर्माण क्षेत्र को भी बढ़ावा दिया है, रोजगार के अवसर पैदा किए हैं और आर्थिक विकास में योगदान दिया है। टिकाऊ प्रौद्योगिकियों पर ध्यान केंद्रित करने से पर्यावरण के अनुकूल शहरी विकास को बढ़ावा मिलता है।