कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान में बाघों की आबादी में वृद्धि
2026-10-26पृष्ठभूमि: भारत बाघों के लिए गहन संरक्षण प्रयास कर रहा है, जिससे पिछले दशक में उनकी आबादी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान, एक प्रमुख बाघ अभयारण्य, ने लगातार सकारात्मक रुझान दिखाए हैं।
वर्तमान संदर्भ: अक्टूबर 2026 में किए गए हालिया सर्वेक्षणों से कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान के भीतर बाघों की आबादी में और वृद्धि का संकेत मिलता है, अनुमानों के अनुसार पिछली जनगणना की तुलना में लगभग 15% की वृद्धि हुई है। यह वृद्धि प्रभावी अवैध शिकार विरोधी उपायों और आवास प्रबंधन का परिणाम है।
प्रभाव: कॉर्बेट में बाघों की बढ़ती आबादी भारत के प्रोजेक्ट टाइगर की सफलता को दर्शाती है। यह पार्क और आसपास के क्षेत्रों में पारिस्थितिक संतुलन को मजबूत करता है, इको-टूरिज्म की क्षमता को बढ़ाता है और बड़े मांसाहारी जीवों के लिए निरंतर संरक्षण रणनीतियों के महत्व को रेखांकित करता है।
नए आर्द्रभूमि रामसर स्थलों के रूप में नामित
2026-10-26पृष्ठभूमि: रामसर कन्वेंशन आर्द्रभूमियों के संरक्षण और टिकाऊ उपयोग के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय संधि है। भारत अंतरराष्ट्रीय महत्व के आर्द्रभूमियों को नामांकित करके अपने रामसर स्थलों की संख्या बढ़ाने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा है।
वर्तमान संदर्भ: अक्टूबर 2026 के अंत में, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने भारत भर में तीन नई आर्द्रभूमियों को रामसर स्थलों के रूप में नामित करने की घोषणा की। इनमें गुजरात में 'कच्छ मैंग्रोव' और पश्चिमी घाट क्षेत्र में दो मीठे पानी की झीलें शामिल हैं, जिन्हें उनकी अनूठी जैव विविधता और पारिस्थितिक महत्व के लिए मान्यता दी गई है।
प्रभाव: इन स्थलों के जुड़ने से रामसर कन्वेंशन के तहत आर्द्रभूमि संरक्षण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता मजबूत होती है। यह अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देगा, संरक्षण और प्रबंधन के लिए धन आकर्षित करेगा, और टिकाऊ प्रथाओं को बढ़ावा देगा, जिससे महत्वपूर्ण पारिस्थितिक तंत्र और उनके द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाओं की रक्षा होगी।
समुद्री पारिस्थितिक तंत्र में प्लास्टिक प्रदूषण से निपटने की पहल
2026-10-26पृष्ठभूमि: प्लास्टिक प्रदूषण विश्व स्तर पर समुद्री जीवन और तटीय पारिस्थितिक तंत्र के लिए एक गंभीर खतरा है। भारत प्लास्टिक के उपयोग को कम करने और कचरे के प्रबंधन के लिए विभिन्न उपाय लागू कर रहा है।
वर्तमान संदर्भ: अक्टूबर 2026 तक, राष्ट्रीय तटीय अनुसंधान केंद्र (NCCR) ने समुद्री वातावरण में प्लास्टिक प्रदूषण की निगरानी और उसे कम करने के लिए चुनिंदा तटीय राज्यों में एक नई पायलट परियोजना शुरू की है। इस पहल में सामुदायिक भागीदारी, सफाई अभियान और बायोडिग्रेडेबल विकल्पों का विकास शामिल है।
प्रभाव: इस परियोजना का उद्देश्य भारत के महासागरों में प्रवेश करने वाले प्लास्टिक की मात्रा को काफी कम करना, समुद्री जैव विविधता की रक्षा करना और तटीय क्षेत्रों के स्वास्थ्य में सुधार करना है। इसका उद्देश्य प्लास्टिक कचरे के हानिकारक प्रभावों के बारे में जन जागरूकता बढ़ाना और जिम्मेदार उपभोग पैटर्न को बढ़ावा देना भी है।