राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ने 'ग्रीन कोरिडोर' पहल शुरू की
2026-10-25पृष्ठभूमि: राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) भारत सरकार द्वारा स्थापित एक सांविधिक और संवैधानिक निकाय है जो जैविक विविधता अधिनियम, 2002 के प्रावधानों को लागू करता है। इसके जनादेश में जैव विविधता का संरक्षण, इसके घटकों का सतत उपयोग और जैविक संसाधनों के उपयोग से उत्पन्न होने वाले लाभों का उचित बंटवारा शामिल है।
वर्तमान संदर्भ: 24 अक्टूबर 2026 को, NBA ने अपनी महत्वाकांक्षी 'ग्रीन कोरिडोर' पहल की शुरुआत की घोषणा की। इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारत भर में वनस्पतियों और जीवों के खंडित आवासों को जोड़ने वाले पारिस्थितिक गलियारों की स्थापना और सुरक्षा करना है। यह पहल महत्वपूर्ण वन्यजीव आवागमन पथों की पहचान करने और परिदृश्य प्रबंधन और सामुदायिक जुड़ाव के माध्यम से उनके निर्बाध मार्ग को सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित करेगी।
प्रभाव: 'ग्रीन कोरिडोर' पहल से अलग-थलग आबादी के बीच जीन प्रवाह को सुविधाजनक बनाकर, मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करके और जलवायु परिवर्तन के प्रति पारिस्थितिक तंत्र के लचीलेपन में सुधार करके वन्यजीव संरक्षण में काफी वृद्धि होने की उम्मीद है। यह इको-टूरिज्म और सतत संसाधन प्रबंधन के माध्यम से स्थानीय समुदायों का भी समर्थन करेगा।
पर्यावरण मंत्रालय ने वन आवरण वृद्धि पर रिपोर्ट जारी की
2026-10-25पृष्ठभूमि: भारत जलवायु परिवर्तन शमन और जैव विविधता संरक्षण रणनीतियों के हिस्से के रूप में अपने वन और वृक्ष आवरण को बढ़ाने में सक्रिय रूप से लगा हुआ है। भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI) नियमित रूप से देश के वन संसाधनों की निगरानी और रिपोर्ट करता है।
वर्तमान संदर्भ: 23 अक्टूबर 2026 को, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने वन आवरण वृद्धि पर अपनी नवीनतम रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट में कई राज्यों में वन आवरण में उल्लेखनीय वृद्धि पर प्रकाश डाला गया है, विशेष रूप से पूर्वोत्तर और पश्चिमी घाट क्षेत्रों में, जिसका श्रेय प्रभावी वनीकरण अभियानों और वन संरक्षण कानूनों के सख्त प्रवर्तन को दिया जाता है। रिपोर्ट में संरक्षण के लिए तत्काल ध्यान देने वाले क्षेत्रों की भी पहचान की गई है।
प्रभाव: वन आवरण में यह सकारात्मक प्रवृत्ति कार्बन पृथक्करण, पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने, जलविभाजकों की रक्षा करने और ग्रामीण आजीविका का समर्थन करने के लिए महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट के निष्कर्ष भविष्य की नीतिगत निर्णयों और संरक्षण प्रयासों का मार्गदर्शन करेंगे, जो भारत की जलवायु लक्ष्यों और सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता को मजबूत करेंगे।