आक्रामक विदेशी प्रजातियों से भारत की जैव विविधता को खतरा
2026-10-24पृष्ठभूमि: आक्रामक विदेशी प्रजातियां (IAS) गैर-देशी जीव हैं जो नए वातावरण में स्थापित हो जाती हैं, अक्सर देशी प्रजातियों को पछाड़ देती हैं और पारिस्थितिक तंत्र को बाधित करती हैं। भारत, अपने विविध आवासों के साथ, विशेष रूप से संवेदनशील है।
वर्तमान संदर्भ: हालिया आकलन इस बात पर प्रकाश डालते हैं कि IAS भारत की समृद्ध जैव विविधता के लिए एक महत्वपूर्ण खतरा पैदा करती हैं, जो कृषि, मत्स्य पालन और प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्र को प्रभावित करती हैं। जलकुंभी, लैंटाना और विभिन्न कीड़ों जैसी प्रजातियां व्यापक पारिस्थितिक और आर्थिक क्षति पहुंचा रही हैं। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय उनके प्रबंधन के लिए रणनीतियों पर सक्रिय रूप से काम कर रहा है।
प्रभाव: IAS का अनियंत्रित प्रसार देशी प्रजातियों के विलुप्त होने, आवास संरचनाओं को बदलने, पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं को कम करने और प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर क्षेत्रों में भारी आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है। संरक्षण के लिए प्रभावी नियंत्रण उपाय महत्वपूर्ण हैं।
आक्रामक विदेशी प्रजातियों के नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना
2026-10-24पृष्ठभूमि: भारत की प्राकृतिक विरासत और अर्थव्यवस्था के लिए आक्रामक विदेशी प्रजातियों (IAS) द्वारा उत्पन्न गंभीर खतरे को पहचानते हुए, सरकार व्यापक रणनीतियाँ विकसित कर रही है।
वर्तमान संदर्भ: अक्टूबर 2026 तक, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय आक्रामक विदेशी प्रजातियों के नियंत्रण के लिए एक मजबूत राष्ट्रीय कार्य योजना को अंतिम रूप दे रहा है। इस योजना का उद्देश्य पूरे देश में IAS की रोकथाम, शीघ्र पता लगाने, त्वरित प्रतिक्रिया और दीर्घकालिक प्रबंधन के लिए एक ढांचा स्थापित करना है। इसमें अंतर-मंत्रालयी समन्वय और क्षमता निर्माण शामिल है।
प्रभाव: इस कार्य योजना के कार्यान्वयन से भारत की जैव विविधता, कृषि और आजीविका पर IAS के नकारात्मक प्रभावों में काफी कमी आने की उम्मीद है। यह देशी पारिस्थितिक तंत्र की रक्षा करके बेहतर पारिस्थितिक लचीलापन को बढ़ावा देगा और सतत विकास का समर्थन करेगा।