टिकाऊ कृषि के लिए राष्ट्रीय पहल शुरू
2026-10-16पृष्ठभूमि: कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था का एक आधार स्तंभ है, लेकिन पारंपरिक प्रथाएं अक्सर पर्यावरणीय क्षरण का कारण बनती हैं। इसे पहचानते हुए, सरकार ने टिकाऊ कृषि विधियों को प्राथमिकता दी है।
वर्तमान संदर्भ: 15 अक्टूबर 2026 को, कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने 'हरित कृषि अभियान' की घोषणा की, जो जैविक खेती को बढ़ावा देने, रासायनिक कीटनाशकों के उपयोग को कम करने और मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार करने के उद्देश्य से एक राष्ट्रव्यापी पहल है। यह अभियान जैविक आदानों के लिए सब्सिडी और किसानों के लिए प्रशिक्षण प्रदान करेगा।
प्रभाव: इस पहल से कृषि भूमि के पारिस्थितिक संतुलन में वृद्धि, उपज की गुणवत्ता में सुधार और किसानों तथा उपभोक्ताओं दोनों के दीर्घकालिक स्वास्थ्य में योगदान की उम्मीद है, साथ ही जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को भी कम किया जा सकेगा।
आरक्षित वनों में बाघों की आबादी में उल्लेखनीय वृद्धि
2026-10-16पृष्ठभूमि: भारत प्रोजेक्ट टाइगर में सक्रिय रूप से शामिल रहा है, जो 1973 में बाघों की आबादी और उनके आवासों की रक्षा के लिए शुरू किया गया एक व्यापक संरक्षण प्रयास है। नियमित निगरानी और अवैध शिकार विरोधी उपाय इसके महत्वपूर्ण घटक हैं।
वर्तमान संदर्भ: 14 अक्टूबर 2026 को जारी नवीनतम जनगणना आंकड़ों के अनुसार, भारत के आरक्षित वनों में बाघों की आबादी में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। पिछली जनगणना की तुलना में बाघों की संख्या में लगभग 15% की वृद्धि हुई है, जिसमें कॉर्बेट और बांधवगढ़ जैसे विशिष्ट आरक्षित वनों ने असाधारण वृद्धि दिखाई है। इस सफलता का श्रेय बेहतर आवास प्रबंधन और कड़े अवैध शिकार विरोधी गश्त को दिया जाता है।
प्रभाव: बाघों की संख्या में वृद्धि सफल संरक्षण रणनीतियों और बेहतर पारिस्थितिकी तंत्र स्वास्थ्य का एक मजबूत संकेतक है। यह जैव विविधता संरक्षण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है और वन्यजीव संरक्षण में वैश्विक नेता के रूप में इसकी स्थिति को पुष्ट करता है।
तटीय क्षेत्रों में प्लास्टिक कचरे को नियंत्रित करने के लिए नई नीति
2026-10-16पृष्ठभूमि: प्लास्टिक प्रदूषण समुद्री पारिस्थितिक तंत्र के लिए एक गंभीर खतरा है, जो वन्यजीवों और मानव स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। भारत विशेष रूप से पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील तटीय क्षेत्रों में अपने प्लास्टिक फुटप्रिंट को कम करने के लिए काम कर रहा है।
वर्तमान संदर्भ: 16 अक्टूबर 2026 को, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने अगले दो वर्षों के भीतर सभी तटीय क्षेत्रों से एकल-उपयोग प्लास्टिक को समाप्त करने के उद्देश्य से एक सख्त नई नीति की घोषणा की। नीति में प्रतिबंधों का कड़ा प्रवर्तन, बायोडिग्रेडेबल विकल्पों को बढ़ावा देना और तटरेखा के साथ बेहतर अपशिष्ट प्रबंधन अवसंरचना शामिल है।
प्रभाव: इस नीति से समुद्री प्रदूषण में काफी कमी आने, तटीय जैव विविधता की रक्षा होने और भारत के समुद्र तटों और समुद्री वातावरण के सौंदर्य और पारिस्थितिक मूल्य में सुधार होने की उम्मीद है। इसका उद्देश्य प्लास्टिक कचरे के लिए एक चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना भी है।