राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के पर्यावरणीय प्रभाव आकलन में भारत की प्रगति
2026-09-26पृष्ठभूमि: भारत ने राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन की शुरुआत की है ताकि खुद को हरित हाइड्रोजन उत्पादन और निर्यात के लिए एक वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित किया जा सके, जिसका लक्ष्य विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण डीकार्बोनाइजेशन है। इस मिशन में बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे का विकास और संसाधन उपयोग शामिल है। वर्तमान संदर्भ: सितंबर 2026 के अंत तक, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय कथित तौर पर कई प्रमुख हरित हाइड्रोजन उत्पादन समूहों के समेकित पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) रिपोर्टों की समीक्षा कर रहा है। यह समीक्षा आगामी परियोजनाओं के लिए स्थायी प्रथाओं, न्यूनतम पारिस्थितिक व्यवधान और कड़े पर्यावरणीय मानकों के पालन को सुनिश्चित करने पर केंद्रित है। प्रभाव: मजबूत पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों का सफल एकीकरण मिशन की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करेगा, प्रतिकूल पारिस्थितिक प्रभावों को रोकेगा और वैश्विक जलवायु कार्रवाई में भारत की विश्वसनीयता बढ़ाएगा। यह बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए भविष्य की नीतिगत निर्णयों का भी मार्गदर्शन करेगा।
'गंगा पुनर्जीवन' पहल के तहत प्रोजेक्ट डॉल्फिन का विस्तार
2026-09-26पृष्ठभूमि: प्रोजेक्ट डॉल्फिन भारत के राष्ट्रीय जलीय पशु, गंगा डॉल्फिन और उसके जलीय आवासों के संरक्षण के लिए शुरू किया गया था। यह प्रदूषण कम करने, अवैध शिकार को रोकने और नदी पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य के बारे में जागरूकता बढ़ाने पर केंद्रित है। वर्तमान संदर्भ: सितंबर 2026 में, राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) ने गंगा और उसकी सहायक नदियों के अतिरिक्त हिस्सों को शामिल करने के लिए प्रोजेक्ट डॉल्फिन के विस्तार की घोषणा की, विशेष रूप से घटती डॉल्फिन आबादी वाले क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया। यह चरण समुदाय-नेतृत्व वाले संरक्षण प्रयासों और उन्नत निगरानी प्रौद्योगिकियों पर जोर देता है। प्रभाव: इस विस्तार से गंगा डॉल्फिन की संरक्षण स्थिति में उल्लेखनीय वृद्धि होने, नदी पारिस्थितिकी तंत्र के समग्र स्वास्थ्य में सुधार होने और नदी सफाई तथा जैव विविधता संरक्षण पहलों में अधिक सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जिससे नमामि गंगे कार्यक्रम के व्यापक लक्ष्यों में योगदान मिलेगा।