ग्रीन इंडिया मिशन की राष्ट्रीय प्रगति समीक्षा
2026-09-23पृष्ठभूमि: राष्ट्रीय हरित भारत मिशन (NMGI) देश में वन और वृक्ष आवरण बढ़ाने, पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं में सुधार करने और वनों पर निर्भर समुदायों की आजीविका को बढ़ाने के लिए शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य विभिन्न वनीकरण और वन संरक्षण रणनीतियों के माध्यम से इसे प्राप्त करना है।
वर्तमान संदर्भ: 22 सितंबर 2026 को NMGI की प्रगति का आकलन करने के लिए एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। वृक्षारोपण, वन बहाली और सामुदायिक भागीदारी से संबंधित प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों पर चर्चा की गई। मिशन ने कथित तौर पर कई राज्यों में वन आवरण का विस्तार करने में महत्वपूर्ण मील के पत्थर हासिल किए हैं, जिसमें निम्नीकृत वन भूमि पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
प्रभाव: मिशन की सफलता भारत के जलवायु परिवर्तन शमन लक्ष्यों, जैव विविधता को बढ़ाने और मिट्टी और जल संरक्षण में सुधार के लिए महत्वपूर्ण है। बढ़ा हुआ वन आवरण कार्बन पृथक्करण में भी योगदान देता है और स्थायी वन प्रबंधन के माध्यम से आर्थिक लाभ प्रदान करता है।
तटीय पारिस्थितिकी तंत्र बहाली के लिए नए दिशानिर्देश
2026-09-23पृष्ठभूमि: तटीय पारिस्थितिकी तंत्र, जैसे मैंग्रोव और कोरल रीफ, तटरेखाओं को कटाव और तूफान की लहरों से बचाने, समृद्ध जैव विविधता का समर्थन करने और मत्स्य पालन के माध्यम से आजीविका प्रदान करने के लिए महत्वपूर्ण हैं। वे तेजी से जलवायु परिवर्तन और मानवीय गतिविधियों से खतरे में हैं।
वर्तमान संदर्भ: 21 सितंबर 2026 को, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने निम्नीकृत तटीय पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली के लिए व्यापक नए दिशानिर्देश जारी किए। ये दिशानिर्देश वैज्ञानिक दृष्टिकोण, सामुदायिक जुड़ाव और पुनर्वास के लिए देशी प्रजातियों के उपयोग पर जोर देते हैं। इनमें बहाली परियोजनाओं की प्रभावशीलता की निगरानी के लिए प्रावधान भी शामिल हैं।
प्रभाव: इन दिशानिर्देशों के कार्यान्वयन से प्राकृतिक आपदाओं के खिलाफ भारत की तटरेखाओं के लचीलेपन में काफी वृद्धि होने की उम्मीद है। यह समुद्री जैव विविधता के संरक्षण, पानी की गुणवत्ता में सुधार और तटीय समुदायों की आर्थिक भलाई का समर्थन करने में भी मदद करेगा।
हिम तेंदुए के लिए वन्यजीव संरक्षण प्रयास
2026-09-23पृष्ठभूमि: हिम तेंदुआ मध्य और दक्षिण एशिया के पहाड़ी क्षेत्रों में पाया जाने वाला एक लुप्तप्राय प्रजाति है, जिसमें भारतीय हिमालय भी शामिल हैं। यह अपने पारिस्थितिकी तंत्र में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है लेकिन आवास की कमी, अवैध शिकार और जलवायु परिवर्तन से खतरों का सामना करता है।
वर्तमान संदर्भ: चल रहे संरक्षण प्रयासों के हिस्से के रूप में, भारतीय वन्यजीव संस्थान ने स्थानीय वन विभागों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के सहयोग से, 20 सितंबर 2026 तक लद्दाख और हिमाचल प्रदेश में प्रमुख हिम तेंदुए आवासों में निगरानी और अवैध शिकार विरोधी गश्त तेज कर दी है। जनसंख्या की गतिशीलता और आवागमन के पैटर्न का अध्ययन करने के लिए कैमरा ट्रैप तैनात किए गए हैं।
प्रभाव: इन संवर्धित संरक्षण उपायों का उद्देश्य भारत में हिम तेंदुए की आबादी के भविष्य को सुरक्षित करना है। इस शीर्ष शिकारी की रक्षा करना नाजुक पहाड़ी पारिस्थितिकी तंत्र को संरक्षित करने में भी मदद करता है, जो लाखों लोगों के लिए जल संसाधनों के लिए महत्वपूर्ण है।