राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) ने बाघों की आबादी में महत्वपूर्ण वृद्धि की सूचना दी
2026-09-22पृष्ठभूमि: भारत 1973 से प्रोजेक्ट टाइगर के माध्यम से बाघों, एक प्रमुख प्रजाति के लिए गहन संरक्षण प्रयास कर रहा है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) बाघ संरक्षण के लिए जिम्मेदार वैधानिक निकाय है।
वर्तमान संदर्भ: 20 सितंबर 2026 को NTCA द्वारा जारी नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, भारत की बाघों की आबादी में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है, जो पिछले अनुमानों से अधिक है। रिपोर्ट इस सफलता का श्रेय विभिन्न बाघ अभयारण्यों में बढ़ी हुई अवैध शिकार विरोधी उपायों, आवास बहाली और संरक्षण प्रयासों में सामुदायिक भागीदारी को देती है।
प्रभाव: बाघों की संख्या में यह वृद्धि संरक्षण की एक बड़ी सफलता का प्रतीक है, जो भारत की जैव विविधता के प्रति प्रतिबद्धता को मजबूत करती है। इससे बाघ अभयारण्यों के आसपास और उनके भीतर इको-टूरिज्म को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जो स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं में योगदान देगा और वन पारिस्थितिक तंत्र के पारिस्थितिक संतुलन को मजबूत करेगा।
सरकार ने वन आवरण बढ़ाने के लिए 'ग्रीन इंडिया मिशन 2.0' लॉन्च किया
2026-09-22पृष्ठभूमि: 'ग्रीन इंडिया मिशन' को शुरू में देश भर में वन और वृक्ष आवरण बढ़ाने के लिए लॉन्च किया गया था, जिसका उद्देश्य जलवायु परिवर्तन से लड़ना और पारिस्थितिक सुरक्षा को बढ़ाना था। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ऐसी पहलों की देखरेख करता है।
वर्तमान संदर्भ: 18 सितंबर 2026 को, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मूल मिशन के एक संशोधित और विस्तारित संस्करण 'ग्रीन इंडिया मिशन 2.0' के शुभारंभ को मंजूरी दे दी। यह चरण 2030 तक वन आवरण में 5% की अतिरिक्त वृद्धि के लक्ष्य के साथ, निम्नीकृत वन क्षेत्रों में वनीकरण, शहरी हरितीकरण और कृषि वानिकी को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।
प्रभाव: उन्नत मिशन से भारत की कार्बन पृथक्करण क्षमता में काफी सुधार होने, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने और जैव विविधता को बढ़ाने की उम्मीद है। यह वृक्षारोपण अभियानों और वन प्रबंधन गतिविधियों के माध्यम से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी पैदा करेगा।
तटीय क्षेत्र प्रबंधन पर नई राष्ट्रीय नीति को मंजूरी मिली
2026-09-22पृष्ठभूमि: भारत का विशाल तटरेखा पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील है और विकास, प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन से खतरों का सामना करता है। तटीय विनियमन क्षेत्र (CRZ) अधिसूचनाएं प्राथमिक नियामक ढांचा रही हैं।
वर्तमान संदर्भ: पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 21 सितंबर 2026 को तटीय क्षेत्र प्रबंधन पर नई राष्ट्रीय नीति के अनुमोदन की घोषणा की। इस नीति का उद्देश्य पारिस्थितिक संरक्षण को सतत विकास के साथ संतुलित करना है, जिसमें जलवायु लचीलापन और सामुदायिक भागीदारी के सिद्धांतों को शामिल किया गया है। यह तटीय क्षेत्रों में अनुमेय गतिविधियों और विकास के लिए अद्यतन दिशानिर्देश प्रस्तुत करता है।
प्रभाव: नई नीति से नाजुक तटीय पारिस्थितिक तंत्र की रक्षा, समुद्री संसाधनों का स्थायी रूप से प्रबंधन करने और समुद्र-स्तर में वृद्धि तथा चरम मौसम की घटनाओं के प्रभावों को कम करने के लिए एक अधिक मजबूत ढांचा प्रदान करने की उम्मीद है। यह पर्यावरणीय सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए विकास प्रक्रियाओं को भी सुव्यवस्थित करेगा।