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भारत की अर्थव्यवस्था: आरबीआई नीति, ग्रीन हाइड्रोजन पीएलआई अपडेट

मुद्रास्फीति की चिंताओं के बीच आरबीआई ने रेपो दर 6.5% पर बरकरार रखी
2026-10-06
पृष्ठभूमि: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने और आर्थिक विकास का समर्थन करने के लिए नियमित रूप से अपनी मौद्रिक नीति की समीक्षा करता है। ये द्विमासिक समीक्षाएं वित्तीय बाजारों के लिए महत्वपूर्ण हैं। वर्तमान संदर्भ: 6 अक्टूबर 2026 को, आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने अपनी समीक्षा पूरी की, जिसमें लगातार पांचवीं बार रेपो दर को 6.5% पर बरकरार रखा गया। यह निर्णय वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और घरेलू मुद्रास्फीति की चिंताओं, विशेषकर खाद्य कीमतों को लेकर, एक सतर्क दृष्टिकोण को दर्शाता है। गवर्नर शक्तिकांत दास ने मुद्रास्फीति को लक्ष्य सीमा के भीतर लाने की प्रतिबद्धता पर जोर दिया। प्रभाव: ब्याज दरों में स्थिरता उधारकर्ताओं और निवेशकों के लिए पूर्वानुमेयता प्रदान करती है, जिससे निवेश को प्रोत्साहन मिल सकता है। हालांकि, लगातार मुद्रास्फीति की चिंताएं उपभोक्ता खर्च को कम कर सकती हैं। आरबीआई का रुख निरंतर सतर्कता का संकेत देता है, जो बैंकों की उधार दरों और समग्र बाजार भावना को प्रभावित करता है।
सरकार ने ग्रीन हाइड्रोजन क्षेत्र के लिए नई पीएलआई योजना शुरू की
2026-10-06
पृष्ठभूमि: भारत विभिन्न उत्पादन-संबद्ध प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाओं के माध्यम से घरेलू विनिर्माण और स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रहा है। इन पहलों का उद्देश्य स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देना और प्रमुख क्षेत्रों में वैश्विक चैंपियन बनाना है। वर्तमान संदर्भ: 6 अक्टूबर 2026 को, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने ग्रीन हाइड्रोजन क्षेत्र के लिए विशेष रूप से एक नई पीएलआई योजना की घोषणा की, जिसमें पांच वर्षों में ₹15,000 करोड़ का परिव्यय होगा। इस पहल का उद्देश्य इलेक्ट्रोलाइजर के घरेलू विनिर्माण और ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन को प्रोत्साहित करना है, जो भारत के महत्वाकांक्षी नेट-जीरो लक्ष्यों और ऊर्जा सुरक्षा उद्देश्यों के अनुरूप है। प्रभाव: इस योजना से महत्वपूर्ण निजी निवेश आकर्षित होने, तकनीकी नवाचार को बढ़ावा मिलने और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में कई नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है। यह जीवाश्म ईंधन पर भारत की निर्भरता को कम करेगा, हरित प्रौद्योगिकियों में निर्यात क्षमताओं को बढ़ाएगा और देश को वैश्विक ग्रीन हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था में एक अग्रणी के रूप में स्थापित करेगा।
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