2026 की तीसरी तिमाही में भारत की जीडीपी वृद्धि की गति जारी
2026-09-18पृष्ठभूमि: भारत ने हाल के वर्षों में लगातार मजबूत आर्थिक प्रदर्शन दिखाया है। सरकार ने विकास को बनाए रखने के लिए संरचनात्मक सुधारों और बुनियादी ढांचे के विकास पर ध्यान केंद्रित किया है।
वर्तमान संदर्भ: 2026 की तीसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) के लिए प्रारंभिक अनुमान बताते हैं कि भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में लगभग 7.5% की वृद्धि होने की संभावना है। यह वृद्धि मुख्य रूप से मजबूत घरेलू खपत, सरकार द्वारा बढ़ी हुई पूंजीगत व्यय और विनिर्माण तथा सेवा क्षेत्रों में स्थिर प्रदर्शन के कारण है।
प्रभाव: यह निरंतर जीडीपी वृद्धि भारत की स्थिति को विश्व स्तर पर सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक के रूप में मजबूत करती है। इससे निवेशकों का विश्वास बढ़ने, रोजगार के अवसर पैदा होने और जीवन स्तर में सुधार होने की उम्मीद है। सकारात्मक आर्थिक दृष्टिकोण राजकोषीय समेकन के प्रयासों में भी सहायता करता है।
स्थिर मुद्रास्फीति रुझानों के बीच आरबीआई ने रेपो दर बनाए रखी
2026-09-18पृष्ठभूमि: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) मूल्य स्थिरता सुनिश्चित करने और आर्थिक विकास का समर्थन करने के लिए मौद्रिक नीति का प्रबंधन करता है। मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) प्रमुख ब्याज दरों की नियमित रूप से समीक्षा करती है।
वर्तमान संदर्भ: 17 सितंबर, 2026 को अपनी नवीनतम द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा में, आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने नीतिगत रेपो दर को 6.5% पर अपरिवर्तित रखने का निर्णय लिया। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब अगस्त 2026 के मुद्रास्फीति के आंकड़े 2-6% के लक्ष्य बैंड के भीतर रहे, जो एक स्थिर प्रवृत्ति दर्शाते हैं। एमपीसी ने नोट किया कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताएं बनी हुई हैं, लेकिन घरेलू आर्थिक गतिविधि लचीली बनी हुई है।
प्रभाव: रेपो दर को बनाए रखने से व्यवसायों और उपभोक्ताओं के लिए स्थिरता और पूर्वानुमेयता मिलती है, जो ऋण प्रवाह और निवेश का समर्थन करती है। यह मुद्रास्फीति के प्रबंधन में आरबीआई के विश्वास को दर्शाता है, साथ ही यह सुनिश्चित करता है कि मौद्रिक नीति आर्थिक सुधार और विकास को बढ़ावा देने के लिए पर्याप्त रूप से अनुकूल बनी रहे।