वैश्विक अस्थिरता के बीच आरबीआई का तरलता प्रबंधन पर जोर
2026-09-16पृष्ठभूमि: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) मूल्य स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए घरेलू तरलता की निरंतर निगरानी करता है। वर्तमान संदर्भ: सितंबर 2026 के मध्य तक, आरबीआई ने तरलता प्रबंधन के प्रति सतर्क रुख अपनाया है, जो मुद्रास्फीति के दबाव और ऋण वृद्धि की आवश्यकता के बीच संतुलन बना रहा है। केंद्रीय बैंक अल्पकालिक तरलता उतार-चढ़ाव को प्रबंधित करने के लिए परिवर्तनीय दर रेपो नीलामी का उपयोग कर रहा है। प्रभाव: इस रणनीति का उद्देश्य अंतर-बैंक कॉल मनी मार्केट में अत्यधिक अस्थिरता को रोकना है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि बैंक पर्याप्त पूंजी बफर बनाए रखें।
सरकार ने एमएसएमई के लिए डिजिटल ऋण बुनियादी ढांचे का विस्तार किया
2026-09-16पृष्ठभूमि: एमएसएमई भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, फिर भी उन्हें औपचारिक ऋण प्राप्त करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। वर्तमान संदर्भ: 16 सितंबर 2026 को, सरकार ने डिजिटल ऋण बुनियादी ढांचे के विस्तार की घोषणा की, जिसमें अधिक गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) को सार्वजनिक ऋण रजिस्ट्री में एकीकृत किया गया। यह पहल वास्तविक समय के जीएसटी और लेनदेन डेटा का उपयोग करके ऋण आवेदन प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने का प्रयास करती है। प्रभाव: दस्तावेज़ीकरण की बाधाओं और प्रसंस्करण समय को कम करके, इस कदम से छोटे व्यवसायों के बीच ऋण पहुंच में काफी वृद्धि होने की उम्मीद है।