भारतीय नौसेना ने थिएटर लेवल ऑपरेशनल रेडीनेस एक्सरसाइज (TROPEX) 2026 का समापन किया
2026-10-20पृष्ठभूमि: भारतीय नौसेना अपनी परिचालन तत्परता और युद्ध क्षमताओं का आकलन और वृद्धि करने के लिए समय-समय पर बड़े पैमाने पर अभ्यास करती है। TROPEX एक प्रमुख अभ्यास है जो यथार्थवादी युद्ध परिदृश्यों का अनुकरण करता है।
वर्तमान संदर्भ: भारतीय नौसेना ने 18 अक्टूबर 2026 को अपने थिएटर लेवल ऑपरेशनल रेडीनेस एक्सरसाइज (TROPEX) 2026 का सफलतापूर्वक समापन किया। हिंद महासागर क्षेत्र में आयोजित इस अभ्यास में विमान वाहक पोत, विध्वंसक, फ्रिगेट, पनडुब्बियां और समुद्री गश्ती विमान सहित नौसेना की सभी परिचालन इकाइयों ने भाग लिया। इसमें परिचालन योजनाओं को मान्य करने, नए सिद्धांतों का परीक्षण करने और भारतीय सेना और वायु सेना के साथ अंतर-सेवा तालमेल को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया गया।
प्रभाव: TROPEX 2026 ने भारतीय नौसेना की युद्ध तत्परता और जटिल, बहु-डोमेन संचालन करने की उसकी क्षमता को काफी बढ़ावा दिया। इस अभ्यास ने समुद्री सुरक्षा बनाए रखने, समुद्री क्षेत्र में राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने और विकसित खतरों के खिलाफ एक मजबूत रक्षा मुद्रा सुनिश्चित करने के लिए नौसेना की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।
डीआरडीओ ने उन्नत आकाश-एनजी मिसाइल प्रणाली का सफलतापूर्वक परीक्षण किया
2026-10-20पृष्ठभूमि: आकाश मिसाइल प्रणाली एक मध्यम दूरी की, सतह से हवा में मार करने वाली निर्देशित मिसाइल प्रणाली है जिसे भारत के रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा भारतीय वायु सेना और सेना के लिए विकसित किया गया है। आकाश-एनजी (नई पीढ़ी) इसका उन्नत संस्करण है।
वर्तमान संदर्भ: 17 अक्टूबर 2026 को, डीआरडीओ ने ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से आकाश-एनजी मिसाइल प्रणाली के अंतिम विकासात्मक परीक्षण का सफलतापूर्वक संचालन किया। यह मिसाइल 30 किमी तक की दूरी पर उन्नत और स्टील्थ विमानों सहित हवाई खतरों को रोकने के लिए डिज़ाइन की गई है। परीक्षण ने मिसाइल की बेहतर क्षमताओं, जिसमें उन्नत मार्गदर्शन प्रणाली और हल्का वारहेड शामिल है, को मान्य किया।
प्रभाव: आकाश-एनजी के सफल परीक्षण से भारत की वायु रक्षा क्षमताओं में काफी वृद्धि हुई है। यह सशस्त्र बलों को आधुनिक हवाई खतरों का मुकाबला करने में सक्षम एक शक्तिशाली हथियार प्रणाली प्रदान करता है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होती है और आयातित वायु रक्षा प्रणालियों पर निर्भरता कम होती है।