RBI ने उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए डिजिटल लेंडिंग फ्रेमवर्क को मजबूत किया
2026-10-24पृष्ठभूमि: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने निष्पक्ष प्रथाओं और उपभोक्ता संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल लेंडिंग के लिए अपने नियामक ढांचे को लगातार मजबूत किया है।
वर्तमान संदर्भ: अक्टूबर 2026 में, RBI ने डिजिटल लेंडिंग ऐप्स (DLAs) और लेंडिंग सर्विस प्रोवाइडर्स (LSPs) के लिए संशोधित दिशानिर्देश जारी किए। इन अपडेट्स में सख्त डेटा गोपनीयता मानदंड, ऋण मूल्य निर्धारण में बढ़ी हुई पारदर्शिता और मुख्य कार्यों को आउटसोर्स करने पर स्पष्ट प्रतिबंध अनिवार्य हैं। केंद्रीय बैंक ने DLAs के लिए एक भौतिक उपस्थिति और मजबूत शिकायत निवारण तंत्र की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
प्रभाव: इन उपायों का उद्देश्य शिकारी ऋण प्रथाओं पर अंकुश लगाना, डेटा के दुरुपयोग को रोकना और डिजिटल क्रेडिट का लाभ उठाने वाले उपभोक्ताओं के बीच अधिक विश्वास पैदा करना है। इससे भारत में एक अधिक जिम्मेदार और टिकाऊ डिजिटल लेंडिंग पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा मिलेगा।
RBI ने तनावग्रस्त संपत्तियों के समाधान के लिए नया ढांचा पेश किया
2026-10-24पृष्ठभूमि: भारतीय बैंकिंग क्षेत्र ने ऐतिहासिक रूप से गैर-निष्पादित संपत्तियों (NPAs) के साथ चुनौतियों का सामना किया है, जिससे लाभप्रदता और ऋण प्रवाह प्रभावित हुआ है। RBI इन पर काम करने के लिए लगातार तंत्र पर काम कर रहा है।
वर्तमान संदर्भ: अक्टूबर 2026 तक, RBI ने बैंकिंग क्षेत्र में तनावग्रस्त संपत्तियों के समाधान के लिए एक नया, सुव्यवस्थित ढांचा पेश किया है। यह ढांचा तनाव की शीघ्र पहचान, तेज निर्णय लेने और पुनर्गठन विकल्पों में अधिक लचीलेपन पर केंद्रित है। यह बैंकों को कठिनाइयों का सामना कर रहे उधारकर्ताओं के साथ सक्रिय रूप से जुड़ने और संपत्तियों के NPA बनने से पहले व्यवहार्य समाधान योजनाओं का पता लगाने के लिए प्रोत्साहित करता है।
प्रभाव: नए ढांचे से बैंकों की परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार, NPAs के बोझ को कम करने और बैंकिंग प्रणाली के समग्र वित्तीय स्वास्थ्य को बढ़ाने की उम्मीद है। यह बेहतर ऋण वृद्धि को सुगम बनाएगा और आर्थिक स्थिरता में योगदान देगा।