आरबीआई ने अधिक पारदर्शिता के लिए डिजिटल लेंडिंग मानदंडों को बढ़ाया
2026-10-23पृष्ठभूमि: डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म में तेजी से वृद्धि देखी गई है, जिससे पारदर्शिता और उधारकर्ता सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) इस क्षेत्र की बारीकी से निगरानी कर रहा है।
वर्तमान संदर्भ: 23 अक्टूबर, 2026 तक, आरबीआई ने डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म के लिए व्यापक नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। ये दिशानिर्देश ऋण मूल्य निर्धारण, शुल्क और शर्तों में अधिक पारदर्शिता अनिवार्य करते हैं। वे लेंडिंग सर्विस प्रोवाइडर्स (LSPs) को सख्त डेटा गोपनीयता और सुरक्षा मानकों का पालन करने और यह सुनिश्चित करने की भी आवश्यकता है कि सभी आउटसोर्सिंग व्यवस्थाएं पारदर्शी और अनुपालन योग्य हों।
प्रभाव: इन उन्नत मानदंडों से शिकारी ऋण प्रथाओं पर अंकुश लगने, छिपे हुए शुल्कों की घटनाओं में कमी आने और उधारकर्ताओं तथा डिजिटल लेंडिंग संस्थाओं के बीच अधिक विश्वास पैदा होने की उम्मीद है। इससे भारत में एक अधिक जिम्मेदार और टिकाऊ डिजिटल लेंडिंग पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा मिलेगा।
आरबीआई ने डिजिटल ऋणदाताओं के लिए उचित आचरण संहिता अनिवार्य की
2026-10-23पृष्ठभूमि: डिजिटल लेंडिंग के तेजी से विस्तार के कारण अनुचित प्रथाओं और अपारदर्शी ऋण शर्तों के संबंध में शिकायतों में वृद्धि हुई है। आरबीआई एक मजबूत नियामक ढांचा स्थापित करने के लिए काम कर रहा है।
वर्तमान संदर्भ: 22 अक्टूबर, 2026 को, आरबीआई ने घोषणा की कि सभी डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म को उचित आचरण संहिता का सख्ती से पालन करना होगा। यह संहिता ऋण की शर्तों, ब्याज दरों और पुनर्भुगतान अनुसूचियों के स्पष्ट संचार पर जोर देती है। यह अनुचित वसूली प्रथाओं को भी प्रतिबंधित करती है और उधारकर्ताओं के लिए एक स्पष्ट शिकायत निवारण तंत्र अनिवार्य करती है।
प्रभाव: इस कदम का उद्देश्य उपभोक्ताओं को शोषण से बचाना और यह सुनिश्चित करना है कि डिजिटल लेंडिंग ईमानदारी से संचालित हो। यह उधारकर्ताओं को बेहतर जानकारी और समाधान के साथ सशक्त बनाएगा, जिससे वित्तीय समावेशन और जिम्मेदार ऋण पहुंच को बढ़ावा मिलेगा।