आरबीआई ने डिजिटल ऋण के लिए नई पारदर्शिता दिशानिर्देश जारी किए
2026-10-20पृष्ठभूमि: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) उपभोक्ता संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल ऋण ऐप्स के तेजी से विकास की निगरानी कर रहा है। वर्तमान संदर्भ: अक्टूबर 2026 तक, आरबीआई ने अनिवार्य कर दिया है कि सभी डिजिटल ऋण प्लेटफॉर्म को ऋण वितरण से पहले उधारकर्ताओं को मानकीकृत प्रारूप में 'मुख्य तथ्य विवरण' (केएफएस) प्रदान करना होगा। इसमें वार्षिक प्रतिशत दर (एपीआर) और वसूली तंत्र का स्पष्ट खुलासा शामिल है। प्रभाव: इस कदम का उद्देश्य शोषणकारी ऋण प्रथाओं पर अंकुश लगाना, छिपे हुए शुल्कों को कम करना और खुदरा उधारकर्ताओं को सूचित वित्तीय निर्णय लेने के लिए सशक्त बनाना है।
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने एमएसएमई ऋण में मजबूत वृद्धि दर्ज की
2026-10-20पृष्ठभूमि: एमएसएमई भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, और उनके विस्तार के लिए औपचारिक ऋण तक पहुंच महत्वपूर्ण है। वर्तमान संदर्भ: अक्टूबर 2026 में जारी आंकड़ों से पता चलता है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) ने वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही के दौरान एमएसएमई क्षेत्र में ऋण वितरण में 14% की वार्षिक वृद्धि देखी है। यह वृद्धि सरलीकृत डिजिटल आवेदन प्रक्रियाओं और सरकार समर्थित ऋण गारंटी योजनाओं के कारण है। प्रभाव: ऋण प्रवाह में वृद्धि से औद्योगिक उत्पादन को बढ़ावा मिलने, रोजगार के अवसर पैदा होने और भारत में एक मजबूत विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र के सरकारी दृष्टिकोण का समर्थन करने की उम्मीद है।