RBI ने उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए डिजिटल लेंडिंग फ्रेमवर्क को मजबूत किया
2026-10-19पृष्ठभूमि: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने निष्पक्ष प्रथाओं और उपभोक्ता संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल लेंडिंग के लिए अपने नियामक ढांचे को लगातार मजबूत किया है। यह डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म की तीव्र वृद्धि और संबंधित चिंताओं की अवधि के बाद आया है।
वर्तमान संदर्भ: 19 अक्टूबर 2026 तक, RBI ने डिजिटल लेंडिंग के लिए संशोधित दिशानिर्देश जारी किए हैं, जिसमें ऋणदाताओं द्वारा बढ़ी हुई उचित परिश्रम, सभी शुल्कों का पारदर्शी प्रकटीकरण और सख्त डेटा गोपनीयता मानदंडों पर जोर दिया गया है। अद्यतन ढांचे में यह अनिवार्य है कि सभी ऋण वितरण और पुनर्भुगतान केवल उधारकर्ता और विनियमित इकाई के बैंक खातों के बीच निष्पादित किए जाने चाहिए, बिना किसी पास-थ्रू या पूलिंग खातों के।
प्रभाव: इन उपायों का उद्देश्य शिकारी ऋण प्रथाओं पर अंकुश लगाना, अनधिकृत शुल्कों को रोकना और डिजिटल लेंडिंग पारिस्थितिकी तंत्र में अधिक विश्वास पैदा करना है। इससे उपभोक्ताओं के लिए एक सुरक्षित और अधिक पारदर्शी उधार अनुभव होगा और फिनटेक क्षेत्र में जिम्मेदार नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।
RBI ने बैंकों के लिए उन्नत साइबर सुरक्षा उपायों को अनिवार्य किया
2026-10-19पृष्ठभूमि: बढ़ते डिजिटल लेनदेन के युग में, साइबर सुरक्षा वित्तीय क्षेत्र के लिए एक सर्वोपरि चिंता का विषय बन गई है। बैंक परिष्कृत साइबर खतरों द्वारा लगातार लक्षित होते हैं, जिसके लिए मजबूत सुरक्षा प्रोटोकॉल की आवश्यकता होती है।
वर्तमान संदर्भ: 18 अक्टूबर 2026 को, RBI ने सभी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के लिए उन्नत साइबर सुरक्षा अनिवार्यताओं का विवरण देने वाला एक परिपत्र जारी किया। इनमें नेटवर्क सुरक्षा को मजबूत करना, महत्वपूर्ण प्रणालियों के लिए मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन लागू करना, नियमित भेद्यता आकलन करना और व्यापक घटना प्रतिक्रिया योजनाएं स्थापित करना शामिल है। बैंकों को उन्नत थ्रेट इंटेलिजेंस और कर्मचारी प्रशिक्षण कार्यक्रमों में निवेश करने की भी आवश्यकता है।
प्रभाव: इस निर्देश का उद्देश्य साइबर हमलों और डेटा उल्लंघनों के जोखिम को काफी कम करना है, जिससे ग्राहक डेटा और वित्तीय संपत्तियों की सुरक्षा हो सके। यह बैंकिंग प्रणाली में विश्वास को बढ़ाएगा और विकसित साइबर खतरों के खिलाफ डिजिटल वित्तीय सेवाओं के लचीलेपन को सुनिश्चित करेगा।