RBI ने उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए डिजिटल ऋणप्रणाली को मजबूत किया
2026-10-05पृष्ठभूमि: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने निष्पक्ष प्रथाओं और उपभोक्ता संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल ऋण पर अपनी नियामक निगरानी को लगातार मजबूत किया है।
वर्तमान संदर्भ: 5 अक्टूबर, 2026 तक, RBI ने डिजिटल लेंडिंग ऐप्स (DLAs) के लिए संशोधित दिशानिर्देश जारी किए हैं, जिसमें आउटसोर्स की गई गतिविधियों के लिए सख्त 'अपने ग्राहक को जानें' (KYC) मानदंडों को अनिवार्य किया गया है और ऋणदाताओं और उधारकर्ताओं के बैंक खातों के बीच ही सभी ऋण वितरण और पुनर्भुगतान निष्पादित करने की आवश्यकता है।
प्रभाव: इन उपायों का उद्देश्य शिकारी ऋण प्रथाओं पर अंकुश लगाना, डिजिटल ऋण प्रस्तावों में पारदर्शिता बढ़ाना और धोखाधड़ी वाली गतिविधियों से उधारकर्ताओं की रक्षा करना है, जिससे डिजिटल ऋण पारिस्थितिकी तंत्र में अधिक विश्वास पैदा हो।
RBI ने बैंकों में तनावग्रस्त संपत्तियों के समाधान के लिए नया ढांचा पेश किया
2026-10-05पृष्ठभूमि: भारतीय रिज़र्व बैंक ने लगातार बैंकों की परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार और गैर-निष्पादित आस्तियों (NPAs) के कुशल समाधान सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित किया है।
वर्तमान संदर्भ: 4 अक्टूबर, 2026 को, RBI ने बैंकिंग क्षेत्र में तनावग्रस्त संपत्तियों के समाधान के लिए एक नया, सुव्यवस्थित ढांचा पेश किया। इस ढांचे का उद्देश्य बैंकों के लिए उन ऋणों को संबोधित करने के लिए एक अधिक समयबद्ध और कुशल तंत्र प्रदान करना है जो NPA बनने से पहले ही तनाव के संकेत दिखा रहे हैं।
प्रभाव: नए ढांचे से तनावग्रस्त संपत्तियों की त्वरित पहचान और समाधान को सक्षम करके बैंकों के वित्तीय स्वास्थ्य में सुधार होने की उम्मीद है, जिससे संभावित नुकसान कम होगा और नए ऋण के लिए पूंजी मुक्त होगी। यह समग्र वित्तीय स्थिरता में योगदान देगा।