आरबीआई ने डिजिटल ऋण पारदर्शिता के लिए नए दिशानिर्देश जारी किए
2026-09-14पृष्ठभूमि: डिजिटल लेंडिंग ऐप्स के उदय ने डेटा गोपनीयता और अत्यधिक ब्याज दरों को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। वर्तमान संदर्भ: सितंबर 2026 तक, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अनिवार्य कर दिया है कि सभी डिजिटल ऋण संस्थाओं को ऋण निष्पादन से पहले उधारकर्ताओं को मानकीकृत प्रारूप में 'की फैक्ट स्टेटमेंट' (केएफएस) प्रदान करना होगा। यह वार्षिक प्रतिशत दर (एपीआर) और वसूली प्रथाओं के पूर्ण प्रकटीकरण को सुनिश्चित करता है। प्रभाव: इस कदम का उद्देश्य छिपे हुए शुल्कों पर अंकुश लगाना और खुदरा उधारकर्ताओं को शोषणकारी प्रथाओं से बचाना है, जिससे भारत में एक अधिक पारदर्शी डिजिटल क्रेडिट पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा मिलेगा।
वित्त मंत्रालय ने शहरी सहकारी बैंकों के लिए पीसीए ढांचे की समीक्षा की
2026-09-14पृष्ठभूमि: त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई (पीसीए) ढांचा एक पर्यवेक्षी उपकरण है जिसका उपयोग आरबीआई द्वारा कमजोर वित्तीय स्थिति वाले बैंकों की निगरानी के लिए किया जाता है। वर्तमान संदर्भ: सितंबर 2026 के मध्य में, वित्त मंत्रालय ने विशेष रूप से शहरी सहकारी बैंकों (यूसीबी) के लिए पीसीए ढांचे की रणनीतिक समीक्षा शुरू की। यह समीक्षा वर्तमान बाजार अस्थिरता को दर्शाने के लिए पूंजी पर्याप्तता अनुपात और परिसंपत्ति गुणवत्ता मापदंडों को समायोजित करने पर केंद्रित है। प्रभाव: इस पहल से यूसीबी को अधिक परिचालन लचीलापन मिलने की उम्मीद है, साथ ही यह सुनिश्चित होगा कि प्रणालीगत जोखिम नियंत्रित रहें, जिससे अंततः भारत में सहकारी बैंकिंग क्षेत्र की स्थिरता मजबूत होगी।