कच्छ कढ़ाई को जीआई टैग प्राप्त हुआ
2026-10-26पृष्ठभूमि: भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग का उपयोग उन उत्पादों की पहचान के लिए किया जाता है जिनका एक विशिष्ट भौगोलिक मूल होता है और जिनमें उस मूल के कारण गुण या प्रतिष्ठा होती है। भारत में अद्वितीय हस्तशिल्प की एक समृद्ध परंपरा है।
वर्तमान संदर्भ: गुजरात के कच्छ क्षेत्र के पारंपरिक हस्तशिल्प, जटिल और जीवंत कच्छ कढ़ाई को हाल ही में भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग प्रदान किया गया है। यह मान्यता इस कला रूप की प्रामाणिकता और विशिष्टता की रक्षा के लिए स्थानीय कारीगरों और सांस्कृतिक संगठनों के निरंतर प्रयासों का परिणाम है।
प्रभाव: जीआई टैग अनधिकृत उत्पादकों द्वारा 'कच्छ कढ़ाई' नाम के दुरुपयोग को रोकने में मदद करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि वास्तविक कारीगरों को उनके शिल्प से लाभ मिले। इससे कारीगरों की आर्थिक संभावनाओं को बढ़ावा मिलने और कच्छ क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को विश्व स्तर पर बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
राष्ट्रीय संग्रहालय ने प्राचीन पांडुलिपि संग्रह का डिजिटलीकरण किया
2026-10-26पृष्ठभूमि: संग्रहालय भविष्य की पीढ़ियों के लिए ऐतिहासिक कलाकृतियों और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। डिजिटलीकरण मूल्यवान दस्तावेजों की व्यापक पहुंच और दीर्घकालिक संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए एक आधुनिक दृष्टिकोण है।
वर्तमान संदर्भ: राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन के सहयोग से, राष्ट्रीय संग्रहालय ने अपने प्राचीन पांडुलिपि संग्रह के एक महत्वपूर्ण हिस्से के डिजिटलीकरण को पूरा कर लिया है। इस परियोजना में साहित्य, विज्ञान और दर्शन जैसे विभिन्न विषयों को कवर करने वाली सदियों पुरानी दुर्लभ पांडुलिपियों को सावधानीपूर्वक स्कैन करना और सूचीबद्ध करना शामिल था।
प्रभाव: यह पहल इन अमूल्य ऐतिहासिक दस्तावेजों को एक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से दुनिया भर के शोधकर्ताओं, विद्वानों और जनता के लिए सुलभ बनाती है। यह पांडुलिपियों को भौतिक क्षरण से भी बचाता है, जिससे उनके अस्तित्व और अध्ययन को वर्षों तक सुनिश्चित किया जा सके, जिससे भारत के बौद्धिक इतिहास की हमारी समझ समृद्ध हो।