कश्मीरी केसर को मिला भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग
2026-10-04पृष्ठभूमि: भौगोलिक संकेत (जीआई) बौद्धिक संपदा अधिकार का एक रूप है जो किसी वस्तु को एक विशिष्ट मूल, गुणवत्ता, प्रतिष्ठा या अन्य विशेषता के रूप में पहचानता है जो अनिवार्य रूप से उस मूल के कारण होती है। भारत में वस्तुओं के भौगोलिक संकेत (पंजीकरण और संरक्षण) अधिनियम, 1999 के तहत जीआई पंजीकरण के लिए एक मजबूत प्रणाली है।
वर्तमान संदर्भ: क्षेत्र की अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण विकास में, कश्मीरी केसर को आधिकारिक तौर पर भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग प्रदान किया गया है। इस मान्यता से इसके बाजार मूल्य को बढ़ावा मिलने और नकली उत्पादों से इसके बचाव की उम्मीद है। जम्मू और कश्मीर कृषि विभाग द्वारा आवेदन की सुविधा प्रदान की गई थी।
प्रभाव: जीआई टैग असली कश्मीरी केसर को प्रमाणित करने में मदद करेगा, जिससे किसानों को उचित मूल्य सुनिश्चित होगा और बाजार में मिलावटी उत्पादों के प्रवेश को रोका जा सकेगा। इससे कश्मीर घाटी में केसर की खेती और संबंधित पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जो स्थानीय आर्थिक विकास में योगदान देगा।
राष्ट्रीय संग्रहालय ने दुर्लभ पांडुलिपि संग्रह का डिजिटलीकरण किया
2026-10-04पृष्ठभूमि: नई दिल्ली में राष्ट्रीय संग्रहालय में कलाकृतियों और पांडुलिपियों का एक विशाल संग्रह है जो भारत की विविध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का प्रतिनिधित्व करता है। इन अमूल्य संपत्तियों का डिजिटलीकरण उनके संरक्षण और व्यापक पहुंच के लिए महत्वपूर्ण है।
वर्तमान संदर्भ: राष्ट्रीय संग्रहालय ने अपने डिजिटलीकरण परियोजना के एक महत्वपूर्ण चरण को हाल ही में पूरा किया है, जिसमें दुर्लभ और प्राचीन पांडुलिपियों के संग्रह पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इस पहल का उद्देश्य इन नाजुक दस्तावेजों की उच्च-रिज़ॉल्यूशन डिजिटल प्रतियां बनाना है, उन्हें भविष्य की पीढ़ियों के लिए संरक्षित करना और उन्हें शोधकर्ताओं और जनता के लिए ऑनलाइन उपलब्ध कराना है।
प्रभाव: डिजिटाइकृत पांडुलिपियां संग्रहालय के डिजिटल अभिलेखागार के माध्यम से उपलब्ध होंगी, जिससे दुनिया भर के विद्वान उन्हें भौतिक रूप से संभाले बिना उनका अध्ययन कर सकेंगे, जिससे टूट-फूट कम होगी। यह परियोजना अनुसंधान क्षमताओं को बढ़ाती है और भारत के ऐतिहासिक साहित्यिक खजाने के साथ जनता की अधिक सहभागिता को बढ़ावा देती है।