कश्मीरी पश्मीना को जालसाजी से निपटने के प्रयासों के बीच जीआई टैग मिला
2026-09-29पृष्ठभूमि: भौगोलिक संकेत रजिस्ट्री अद्वितीय भारतीय उत्पादों की सुरक्षा में सहायक रही है। कश्मीरी पश्मीना, जो अपनी कोमलता और गर्माहट के लिए जाना जाता है, का कश्मीर घाटी में कारीगरों द्वारा उत्पादन का एक लंबा इतिहास रहा है।
वर्तमान संदर्भ: इसकी प्रामाणिकता और स्थानीय कारीगरों की आजीविका की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में, कश्मीरी पश्मीना को भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग प्रदान किया गया है। यह टैग बाजार में उपलब्ध मशीन-निर्मित या नकली उत्पादों से असली पश्मीना को अलग करने में मदद करेगा।
प्रभाव: जीआई टैग से प्रामाणिक कश्मीरी पश्मीना के निर्यात को बढ़ावा मिलने, इसके बाजार मूल्य में वृद्धि होने और बुनकरों व कारीगरों को बेहतर आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है। यह पारंपरिक शिल्प को संरक्षित करने और नकल के कारण इसके क्षरण को रोकने में भी मदद करेगा।
राष्ट्रीय संग्रहालय ने सुलभता बढ़ाने के लिए दुर्लभ पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण किया
2026-09-29पृष्ठभूमि: नई दिल्ली में राष्ट्रीय संग्रहालय में प्राचीन पांडुलिपियों सहित कलाकृतियों का एक विशाल संग्रह है, जो भारत के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विकास को समझने के लिए महत्वपूर्ण हैं। इनमें से कई नाजुक हैं और इन्हें सावधानीपूर्वक संरक्षण की आवश्यकता है।
वर्तमान संदर्भ: राष्ट्रीय संग्रहालय ने अपनी दुर्लभ और प्राचीन पांडुलिपियों के संग्रह को डिजिटल बनाने की एक व्यापक परियोजना शुरू की है। इस पहल का उद्देश्य उच्च-रिज़ॉल्यूशन डिजिटल प्रतियां बनाना है, जिससे इन अमूल्य ऐतिहासिक दस्तावेजों को दुनिया भर के शोधकर्ताओं, विद्वानों और जनता के लिए सुलभ बनाया जा सके, साथ ही उनके दीर्घकालिक संरक्षण को भी सुनिश्चित किया जा सके।
प्रभाव: डिजिटलीकरण इन पांडुलिपियों को भौतिक क्षरण और हानि से बचाएगा। यह ऐतिहासिक ज्ञान तक पहुंच को लोकतांत्रिक बनाएगा, नए शोध के रास्ते खोलेगा, और विश्व स्तर पर भारत की समृद्ध साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत की गहरी समझ और प्रशंसा को बढ़ावा देगा।