कश्मीरी पश्मीना को जीआई टैग का नवीनीकरण प्राप्त हुआ
2026-09-20पृष्ठभूमि: भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग उन उत्पादों के लिए उत्पत्ति का एक निशान है जिनमें उस उत्पत्ति के कारण गुण या प्रतिष्ठा होती है। कश्मीरी पश्मीना अपनी कोमलता, गर्माहट और जटिल बुनाई के लिए विश्व स्तर पर प्रसिद्ध है।
वर्तमान संदर्भ: कश्मीरी पश्मीना के लिए जीआई टैग, जो मूल रूप से 2019 में प्रदान किया गया था, सितंबर 2026 से प्रभावी दस वर्षों के लिए सफलतापूर्वक नवीनीकृत किया गया है। यह नवीनीकरण जालसाजी और नकली उत्पादों के खिलाफ निरंतर सुरक्षा सुनिश्चित करता है, जिससे कारीगरों की आजीविका सुरक्षित रहती है।
प्रभाव: नवीनीकरण कश्मीरी पश्मीना की प्रामाणिकता और प्रीमियम गुणवत्ता को मजबूत करता है, जिससे इसके बाजार मूल्य और निर्यात क्षमता में वृद्धि होती है। यह कश्मीर घाटी में बुनकरों की पारंपरिक शिल्प और सामाजिक-आर्थिक स्थिति को संरक्षित करने में भी मदद करता है।
प्राचीन भारतीय पांडुलिपियों के डिजिटल पुरालेखन की पहल
2026-09-20पृष्ठभूमि: भारत में दर्शन, विज्ञान, साहित्य और चिकित्सा जैसे विविध विषयों को कवर करने वाली विभिन्न भाषाओं में प्राचीन पांडुलिपियों का एक विशाल संग्रह है। इनमें से कई नाजुक हैं और क्षरण के जोखिम में हैं।
वर्तमान संदर्भ: संस्कृति मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन (एनएमएम) ने दुर्लभ और लुप्तप्राय प्राचीन भारतीय पांडुलिपियों को डिजिटल रूप से संग्रहीत करने के अपने प्रयासों को तेज कर दिया है। परियोजना का उद्देश्य 2026 के अंत तक 50,000 से अधिक पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण करना है, जिससे वे दुनिया भर के विद्वानों और जनता के लिए सुलभ हो सकें।
प्रभाव: यह पहल अमूल्य ऐतिहासिक और सांस्कृतिक ज्ञान के दीर्घकालिक संरक्षण को सुनिश्चित करती है। यह अनुसंधान को सुगम बनाता है, भाषाई और ऐतिहासिक अध्ययनों को बढ़ावा देता है, और भारत की बौद्धिक विरासत तक पहुंच को लोकतांत्रिक बनाता है, जिससे भौतिक क्षय या क्षति के कारण होने वाले नुकसान को रोका जा सके।