संस्कृति मंत्रालय ने नए जीआई टैग अनुमोदन के साथ पारंपरिक शिल्पों को बढ़ावा दिया
2026-09-19पृष्ठभूमि: माल के भौगोलिक संकेत (पंजीकरण और संरक्षण) अधिनियम, 1999, का उद्देश्य विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्रों से उत्पन्न होने वाले अद्वितीय उत्पादों की रक्षा करना है। संस्कृति मंत्रालय ऐसे विरासत शिल्पों की पहचान और उन्हें बढ़ावा देने में भूमिका निभाता है।
वर्तमान संदर्भ: 19 सितंबर 2026 से पहले के कुछ दिनों में, संस्कृति मंत्रालय ने कथित तौर पर पारंपरिक भारतीय शिल्पों के लिए कई नए भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग को मंजूरी दी है। इनमें कर्नाटक की 'मैसूर सिल्क साड़ी' और बिहार की 'मधुबनी पेंटिंग्स' जैसे आइटम शामिल हैं, जो उनकी अनूठी उत्पत्ति और शिल्प कौशल को मान्यता देते हैं।
प्रभाव: इन अनुमोदनों से इन पारंपरिक शिल्पों के बाजार मूल्य और वैश्विक पहचान में वृद्धि होने की उम्मीद है, जिससे कारीगरों को आर्थिक लाभ मिलेगा और उनसे जुड़ी सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण होगा। यह नकल को रोकने और प्रामाणिकता सुनिश्चित करने में भी मदद करता है।
राष्ट्रीय संग्रहालय ने व्यापक पहुंच के लिए प्राचीन पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण किया
2026-09-19पृष्ठभूमि: नई दिल्ली में राष्ट्रीय संग्रहालय में प्राचीन वस्तुओं का एक विशाल संग्रह है, जिसमें दुर्लभ प्राचीन पांडुलिपियां शामिल हैं जो भारत के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विकास को समझने के लिए महत्वपूर्ण हैं। इन नाजुक दस्तावेजों का संरक्षण सर्वोपरि है।
वर्तमान संदर्भ: 19 सितंबर 2026 तक, राष्ट्रीय संग्रहालय ने अपनी डिजिटलीकरण परियोजना के एक महत्वपूर्ण चरण के पूरा होने की घोषणा की है। विभिन्न ऐतिहासिक अवधियों की विभिन्न भाषाओं और लिपियों में फैली 5,000 से अधिक प्राचीन पांडुलिपियों को स्कैन और डिजिटल रूप से संग्रहीत किया गया है। इस पहल का उद्देश्य इन अमूल्य ऐतिहासिक संसाधनों को दुनिया भर के शोधकर्ताओं और जनता के लिए सुलभ बनाना है।
प्रभाव: डिजिटलीकरण नाजुक पांडुलिपियों के दीर्घकालिक संरक्षण को सुनिश्चित करता है, उन्हें भौतिक क्षरण से बचाता है। यह ऐतिहासिक ज्ञान तक पहुंच को भी लोकतांत्रिक बनाता है, जिससे मूल दस्तावेजों को भौतिक रूप से संभाले बिना अनुसंधान, शिक्षा और सांस्कृतिक प्रशंसा की सुविधा मिलती है।