'मैसूर सिल्क साड़ी' को नया जीआई टैग, पारंपरिक बुनकरों को बढ़ावा
2026-09-16पृष्ठभूमि: भारत के भौगोलिक संकेत रजिस्ट्री उन उत्पादों को जीआई टैग प्रदान करती है जिनमें उनके भौगोलिक मूल के कारण अद्वितीय गुण होते हैं। यह उन्हें नकल से बचाता है और उनके बाजार मूल्य को बढ़ाता है।
वर्तमान संदर्भ: 15 सितंबर 2026 तक, प्रतिष्ठित 'मैसूर सिल्क साड़ी' को आधिकारिक तौर पर भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग प्रदान किया गया है। यह मान्यता एक कठोर आवेदन प्रक्रिया के बाद आई है, जिसमें क्षेत्र की विशेषता वाली अद्वितीय बुनाई तकनीकों, शुद्ध रेशम के उपयोग और पारंपरिक रूपांकनों पर प्रकाश डाला गया है।
प्रभाव: जीआई टैग से मैसूर सिल्क साड़ी के उत्पादन में शामिल बुनकरों और कारीगरों को महत्वपूर्ण लाभ होने की उम्मीद है। यह उत्पाद की प्रामाणिकता को बनाए रखने, नकली वस्तुओं के प्रसार को रोकने और संभावित रूप से निर्यात के अवसरों को बढ़ाने में मदद करेगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा मिलेगा।
राष्ट्रीय संग्रहालय ने प्राचीन पांडुलिपि संग्रह का डिजिटलीकरण किया
2026-09-16पृष्ठभूमि: सांस्कृतिक कलाकृतियों का डिजिटलीकरण उनके संरक्षण, पहुंच और अनुसंधान के लिए महत्वपूर्ण है। यह डिजिटल प्रतिकृतियां बनाने में मदद करता है जिनका मूल नाजुक सामग्रियों को नुकसान पहुंचाने के जोखिम के बिना अध्ययन किया जा सकता है।
वर्तमान संदर्भ: 14 सितंबर 2026 को, राष्ट्रीय संग्रहालय ने प्राचीन पांडुलिपियों के अपने विशाल संग्रह को डिजिटाइज़ करने की अपनी महत्वाकांक्षी परियोजना के पूरा होने की घोषणा की। तीन साल से अधिक समय तक चली इस पहल में ऐतिहासिक दस्तावेजों, धार्मिक ग्रंथों और साहित्यिक कार्यों सहित सैकड़ों दुर्लभ ग्रंथों की उच्च-रिज़ॉल्यूशन स्कैनिंग और कैटलॉगिंग शामिल थी।
प्रभाव: यह डिजिटल संग्रह विद्वानों, शोधकर्ताओं और दुनिया भर के आम जनता के लिए अमूल्य ऐतिहासिक और सांस्कृतिक ज्ञान को सुलभ बनाएगा। यह इन नाजुक पांडुलिपियों के भौतिक क्षरण के खिलाफ दीर्घकालिक संरक्षण सुनिश्चित करता है और तुलनात्मक अध्ययन और भारत की समृद्ध साहित्यिक विरासत के प्रसार के लिए एक मजबूत मंच प्रदान करता है।