प्रामाणिकता के लिए 'कश्मीरी पश्मीना' को जीआई टैग प्रदान किया गया
2026-09-13पृष्ठभूमि: माल के भौगोलिक संकेत (पंजीकरण और संरक्षण) अधिनियम, 1999 का उद्देश्य विशिष्ट भौगोलिक उत्पत्ति वाले अद्वितीय उत्पादों की रक्षा करना है। कश्मीरी पश्मीना अपनी महीनता और गर्माहट के लिए विश्व स्तर पर प्रसिद्ध है।
वर्तमान संदर्भ: 12 सितंबर, 2026 को, भौगोलिक संकेत रजिस्ट्री ने आधिकारिक तौर पर 'कश्मीरी पश्मीना' को जीआई टैग प्रदान किया। इस मान्यता से बाजार में बाढ़ लाने वाले नकली पश्मीना उत्पादों के उत्पादन और बिक्री पर अंकुश लगने की उम्मीद है।
प्रभाव: जीआई टैग असली कश्मीरी पश्मीना को प्रमाणित करने में मदद करेगा, जिससे कारीगरों को उचित मूल्य मिलेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा। यह उपभोक्ताओं को धोखाधड़ी वाले उत्पादों से बचाएगा और इस उत्कृष्ट शिल्प से जुड़ी पारंपरिक बुनाई तकनीकों को भी संरक्षित करेगा।
राष्ट्रीय संग्रहालय ने प्राचीन पांडुलिपि संग्रह का डिजिटलीकरण किया
2026-09-13पृष्ठभूमि: नई दिल्ली में राष्ट्रीय संग्रहालय में ऐतिहासिक कलाकृतियों और पांडुलिपियों का एक विशाल संग्रह है, जो भारत के अतीत में अंतर्दृष्टि प्रदान करता है। इन नाजुक दस्तावेजों का संरक्षण ऐतिहासिक अनुसंधान और सांस्कृतिक निरंतरता के लिए महत्वपूर्ण है।
वर्तमान संदर्भ: 11 सितंबर, 2026 तक, राष्ट्रीय संग्रहालय ने 5,000 से अधिक दुर्लभ और प्राचीन पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण का कार्य पूरा कर लिया है। 'डिजिटल इंडिया' अभियान के हिस्से के रूप में इस पहल में, उच्च-रिज़ॉल्यूशन डिजिटल प्रतियां बनाने के लिए उन्नत स्कैनिंग तकनीक का उपयोग किया गया है।
प्रभाव: डिजिटाइज़ किए गए संग्रह को शोधकर्ताओं, विद्वानों और आम जनता के लिए ऑनलाइन उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे भारत की साहित्यिक विरासत के व्यापक अध्ययन और सराहना में सुविधा होगी। यह इन अमूल्य पांडुलिपियों को भौतिक क्षरण से बचाने के लिए दीर्घकालिक संरक्षण भी सुनिश्चित करता है।