अद्वितीय बुनाई तकनीक के लिए 'मैसूर सिल्क साड़ियों' को जीआई टैग प्रदान किया गया
2026-09-11पृष्ठभूमि: मैसूर सिल्क साड़ियाँ, अपनी शुद्धता और चमक के लिए जानी जाती हैं, दशकों से पारंपरिक भारतीय बुनाई का प्रतीक रही हैं। भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग उत्पत्ति का एक चिह्न है जो प्रामाणिकता और गुणवत्ता सुनिश्चित करता है। वर्तमान संदर्भ: 10 सितंबर 2026 को, भौगोलिक संकेत रजिस्ट्री ने आधिकारिक तौर पर मैसूर सिल्क साड़ियों को जीआई टैग प्रदान किया, विशेष रूप से अद्वितीय हस्त-बुनाई तकनीकों और शुद्ध रेशम व सोने की ज़री के उपयोग को मान्यता दी। यह मान्यता शिल्प की विशिष्टता को उजागर करने वाली एक लंबी आवेदन प्रक्रिया के बाद आई है। प्रभाव: जीआई टैग से मैसूर क्षेत्र में बुनकरों और रेशम उद्योग की आर्थिक संभावनाओं को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। यह अनधिकृत उत्पादकों द्वारा 'मैसूर सिल्क' ब्रांड के दुरुपयोग को रोकने में मदद करेगा और उत्पाद की प्रामाणिकता में उपभोक्ता विश्वास बढ़ाएगा।
राष्ट्रीय संग्रहालय ने दुर्लभ पांडुलिपि संग्रह का डिजिटलीकरण किया
2026-09-11पृष्ठभूमि: नई दिल्ली में राष्ट्रीय संग्रहालय में भारत के अतीत की जानकारी देने वाली अमूल्य प्राचीन पांडुलिपियों सहित ऐतिहासिक कलाकृतियों का एक विशाल संग्रह है। इन नाजुक दस्तावेजों का संरक्षण भविष्य की पीढ़ियों के लिए महत्वपूर्ण है। वर्तमान संदर्भ: 9 सितंबर 2026 तक, राष्ट्रीय संग्रहालय ने प्राचीन संस्कृत ग्रंथों से लेकर मध्यकालीन फारसी इतिहास तक, 5,000 से अधिक दुर्लभ पांडुलिपियों का सफलतापूर्वक डिजिटलीकरण कर लिया है। 'डिजिटल इंडिया' अभियान के हिस्से के रूप में इस पहल में डिजिटल प्रतिकृतियां बनाने के लिए उच्च-रिज़ॉल्यूशन इमेजिंग तकनीक का उपयोग किया गया है। प्रभाव: डिजिटलीकरण परियोजना इन दुर्लभ पांडुलिपियों को शोधकर्ताओं, विद्वानों और आम जनता के लिए ऑनलाइन सुलभ बनाती है, जो भौगोलिक बाधाओं को पार करती है। यह इन नाजुक ऐतिहासिक अभिलेखों के भौतिक क्षय और क्षति के खिलाफ दीर्घकालिक संरक्षण भी सुनिश्चित करता है।