LIVE Access Mock Tests, PYP & AI Analytics for 375+ Exams! 7 Days Free Trial ₹99 Start Free Trial
Current Affairs & MCQs
Latest Questions, Daily Updates & More

पर्यावरण और पारिस्थितिकी समाचार: टिकाऊ कृषि, वन्यजीव संरक्षण, जलवायु परिवर्तन

टिकाऊ कृषि के लिए राष्ट्रीय मिशन का शुभारंभ
2026-10-13
पृष्ठभूमि: पर्यावरण के अनुकूल कृषि पद्धतियों की आवश्यकता को पहचानते हुए, भारत सरकार ने लगातार टिकाऊ कृषि के लिए पहलों को बढ़ावा दिया है। इसमें जैविक खेती को प्रोत्साहित करना और रासायनिक आदानों पर निर्भरता कम करना शामिल है। वर्तमान संदर्भ: 12 अक्टूबर, 2026 को, कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने 'टिकाऊ कृषि के लिए राष्ट्रीय मिशन' (NMSA) के औपचारिक शुभारंभ की घोषणा की। इस मिशन का उद्देश्य पूरे देश में पर्यावरण-अनुकूल कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना, मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार करना और जल उपयोग को अनुकूलित करना है। यह एकीकृत कृषि प्रणालियों, जलवायु-लचीला कृषि और प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग पर ध्यान केंद्रित करेगा। प्रभाव: NMSA से भारतीय कृषि के पारिस्थितिक पदचिह्न में महत्वपूर्ण सुधार होने की उम्मीद है, जिससे स्वस्थ खाद्य उत्पादन, कम लागत के माध्यम से बेहतर किसान आय और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति बढ़ी हुई लचीलापन प्राप्त होगा। यह वैश्विक पर्यावरणीय लक्ष्यों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता का भी समर्थन करता है।
संरक्षित अभयारण्यों में बाघों की आबादी में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई
2026-10-12
पृष्ठभूमि: 1973 में शुरू की गई परियोजना बाघ, भारत में बाघों की आबादी के संरक्षण के उद्देश्य से एक केंद्रीय प्रायोजित योजना है। इसमें बाघ अभयारण्यों की स्थापना और प्रबंधन, आवास संरक्षण सुनिश्चित करना और अवैध शिकार का मुकाबला करना शामिल है। वर्तमान संदर्भ: अक्टूबर 2026 की शुरुआत में जारी नवीनतम अनुमानों के अनुसार, भारत के नामित बाघ अभयारण्यों में बाघों की आबादी में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है, जो लगभग 3,500 व्यक्तियों के करीब है। यह वृद्धि बेहतर संरक्षण उपायों, बेहतर गश्त-रोधी गश्त और कॉर्बेट, बांधवगढ़ और नागरहोल जैसे प्रमुख अभयारण्यों में सफल आवास बहाली के प्रयासों का परिणाम है। प्रभाव: बाघों, एक शीर्ष शिकारी के सफल संरक्षण से एक स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र का संकेत मिलता है। यह न केवल जैव विविधता की रक्षा करता है, बल्कि इन क्षेत्रों में पारिस्थितिकी पर्यटन को भी बढ़ावा देता है, स्थानीय समुदायों को आर्थिक लाभ प्रदान करता है और वैश्विक स्तर पर वन्यजीव संरक्षण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।
जलवायु लक्ष्यों के बीच भारत ने सौर ऊर्जा क्षमता में तेजी लाई
2026-10-12
पृष्ठभूमि: भारत अंतरराष्ट्रीय जलवायु समझौतों का हस्ताक्षरकर्ता रहा है, जिसने अपने कार्बन फुटप्रिंट को कम करने और अपने बिजली मिश्रण में नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए प्रतिबद्धता जताई है। पहले शुरू किए गए राष्ट्रीय सौर मिशन का उद्देश्य भारत को सौर ऊर्जा में वैश्विक नेता के रूप में स्थापित करना था। वर्तमान संदर्भ: अक्टूबर 2026 तक, भारत ने कथित तौर पर सौर ऊर्जा स्थापना के अपने अंतरिम लक्ष्यों को पार कर लिया है, जिसकी संचयी क्षमता 200 गीगावाट से अधिक हो गई है। इस वृद्धि का श्रेय सहायक सरकारी नीतियों, सौर पैनल की लागत में गिरावट और निजी क्षेत्र के बढ़ते निवेश को दिया जाता है। देश भर में कई नए बड़े पैमाने पर सौर पार्क चालू हो गए हैं। प्रभाव: यह तीव्र विस्तार भारत की ऊर्जा सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान देता है, जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करता है, और पेरिस समझौते के तहत अपने राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (एनडीसी) को पूरा करने में मदद करता है। यह नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में रोजगार सृजन को भी बढ़ावा देता है और स्वच्छ वायु गुणवत्ता को बढ़ावा देता है।
जैव विविधता संरक्षण पर नई राष्ट्रीय नीति को मंजूरी
2026-10-11
पृष्ठभूमि: पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने और आवश्यक पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएं प्रदान करने के लिए जैव विविधता संरक्षण महत्वपूर्ण है। भारत ने ऐतिहासिक रूप से अपनी समृद्ध प्राकृतिक विरासत की सुरक्षा पर जोर दिया है। वर्तमान संदर्भ: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 8 अक्टूबर 2026 को हुई बैठक में जैव विविधता संरक्षण पर एक नई राष्ट्रीय नीति को मंजूरी दी। इस नीति का उद्देश्य इन-सीटू (स्थान पर) और एक्स-सीटू (स्थान से बाहर) संरक्षण प्रयासों को मजबूत करना, जैविक संसाधनों के सतत उपयोग को बढ़ावा देना और उनके उपयोग से होने वाले लाभों के समान बंटवारे को सुनिश्चित करना है। प्रभाव: इस नीति से जैव विविधता प्रबंधन के लिए एक मजबूत कानूनी और संस्थागत ढांचा मिलने की उम्मीद है। यह विभिन्न हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय को सुविधाजनक बनाएगी, जैव विविधता में अनुसंधान और विकास को बढ़ाएगी, और भारत के अद्वितीय वनस्पतियों और जीवों के संरक्षण में योगदान देगी, जिससे भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा होगी।
वैश्विक शिखर सम्मेलन में नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता की समीक्षा
2026-10-11
पृष्ठभूमि: भारत ने जलवायु परिवर्तन से निपटने और कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए अपनी नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़ाने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किए हैं। प्रमुख क्षेत्रों में सौर, पवन और जलविद्युत शामिल हैं। वर्तमान संदर्भ: 9 अक्टूबर 2026 को आयोजित वैश्विक जलवायु शिखर सम्मेलन के दौरान, भारत ने अपने नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में अपनी प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। राष्ट्र ने 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन ऊर्जा क्षमता तक पहुंचने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की, जिसमें सौर ऊर्जा की तैनाती और ग्रिड एकीकरण में महत्वपूर्ण प्रगति पर प्रकाश डाला गया। प्रभाव: प्रतिबद्धता की यह पुन: पुष्टि अंतर्राष्ट्रीय जलवायु सहयोग को मजबूत करती है और भारत को स्वच्छ ऊर्जा में वैश्विक परिवर्तन में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित करती है। यह हरित प्रौद्योगिकियों में और अधिक निवेश को प्रोत्साहित करती है और सतत विकास को बढ़ावा देती है, जिससे जलवायु परिवर्तन के खिलाफ वैश्विक प्रयासों में योगदान होता है।
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) ने बाघों की आबादी में रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की
2026-10-11
पृष्ठभूमि: राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत एक वैधानिक निकाय है, जो भारत में बाघों के संरक्षण के लिए जिम्मेदार है। बाघों की आबादी की निगरानी के लिए नियमित मूल्यांकन किए जाते हैं। वर्तमान संदर्भ: 10 अक्टूबर 2026 को जारी नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने अपने बाघों की आबादी में अभूतपूर्व वृद्धि देखी है, अनुमानों से पता चलता है कि पिछली जनगणना की तुलना में इसमें काफी वृद्धि हुई है। रिपोर्ट सफल संरक्षण रणनीतियों और बढ़ी हुई आवास सुरक्षा पर प्रकाश डालती है। प्रभाव: यह उल्लेखनीय वृद्धि प्रोजेक्ट टाइगर और अन्य संरक्षण पहलों की प्रभावशीलता को रेखांकित करती है। यह इको-टूरिज्म को बढ़ावा देती है, वन्यजीव संरक्षण में भारत की स्थिति को मजबूत करती है, और बाघ आवासों में पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में योगदान करती है।
वन स्थिति रिपोर्ट 2026 की मुख्य विशेषताएं
2026-10-10
पृष्ठभूमि: द्विवार्षिक वन स्थिति रिपोर्ट भारत के हरित आवरण का आकलन करने के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। वर्तमान संदर्भ: 10 अक्टूबर 2026 को जारी नवीनतम रिपोर्ट में 2024 की तुलना में राष्ट्रीय मैंग्रोव कवर में 2% की वृद्धि दर्ज की गई है। यह वृद्धि 'मैंग्रोव इनिशिएटिव फॉर शोरलाइन हैबिटेट्स एंड टैंजिबल इनकम्स' (MISHTI) के कारण है। रिपोर्ट में पश्चिमी घाट में वन घनत्व में भी मामूली सुधार देखा गया है। प्रभाव: यह सकारात्मक रुझान हालिया वृक्षारोपण अभियानों और तटीय सुरक्षा नीतियों की सफलता को दर्शाता है, जो भविष्य की जलवायु शमन रणनीतियों के लिए एक मजबूत ढांचा प्रदान करता है।
ग्रीन कॉरिडोर पहल 2026 का शुभारंभ
2026-10-10
पृष्ठभूमि: भारत में मानव-वन्यजीव संघर्ष एक निरंतर समस्या रही है, विशेष रूप से प्रवासी रास्तों को लेकर। वर्तमान संदर्भ: 9 अक्टूबर 2026 को, पर्यावरण मंत्रालय ने हाथियों और बाघों के लिए सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने हेतु 'ग्रीन कॉरिडोर पहल' शुरू की। यह परियोजना अतिक्रमण हटाकर और देशी वनस्पति लगाकर 500 किलोमीटर के गलियारों को बहाल करने पर केंद्रित है। प्रभाव: इस पहल से मानव-पशु संघर्ष में कमी आने और अलग-थलग पड़ी वन्यजीव आबादी के बीच आनुवंशिक आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जिससे जैव विविधता और पारिस्थितिक संतुलन बना रहेगा।
सरकार ने सहायक नदियों पर बढ़े हुए फोकस के साथ 'स्वच्छ गंगा मिशन 2.0' लॉन्च किया
2026-10-09
पृष्ठभूमि: गंगा नदी को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से नमामि गंगे कार्यक्रम, भारतीय सरकार की एक प्रमुख पहल रही है। यह नदी पारिस्थितिकी तंत्र के प्रदूषण निवारण, संरक्षण और बहाली पर केंद्रित है। वर्तमान संदर्भ: अक्टूबर 2026 में, राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) ने 'स्वच्छ गंगा मिशन 2.0' के शुभारंभ की घोषणा की। यह चरण मुख्य नदी पर निरंतर ध्यान देने के साथ-साथ गंगा की प्रमुख सहायक नदियों के लिए गहन सफाई और पुनरोद्धार के प्रयासों को शामिल करने के लिए दायरे का काफी विस्तार करता है। प्रभाव: इस विस्तारित मिशन से एक बड़े नदी नेटवर्क में पानी की गुणवत्ता में सुधार होने की उम्मीद है, जिससे इन जल निकायों पर निर्भर लाखों लोगों को लाभ होगा। यह जैव विविधता को भी बढ़ाएगा और नदी के किनारे स्थायी विकास के अवसर पैदा करेगा।
कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान में बाघों की आबादी में उल्लेखनीय वृद्धि
2026-10-09
पृष्ठभूमि: 1936 में स्थापित कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान, भारत के सबसे पुराने और सबसे सम्मानित वन्यजीव अभयारण्यों में से एक है, जो अपनी महत्वपूर्ण बाघ आबादी और विविध पारिस्थितिकी तंत्र के लिए प्रसिद्ध है। वर्तमान संदर्भ: अक्टूबर 2026 की शुरुआत में जारी नवीनतम जनगणना आंकड़ों से कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान के भीतर बाघों की आबादी में काफी वृद्धि का संकेत मिलता है। प्रारंभिक अनुमानों के अनुसार पिछली जनगणना की तुलना में 15% से अधिक की वृद्धि हुई है, जिसका श्रेय बेहतर वन्यजीव-विरोधी शिकार उपायों, आवास बहाली और सामुदायिक भागीदारी को दिया जाता है। प्रभाव: यह सकारात्मक प्रवृत्ति संरक्षण रणनीतियों की प्रभावशीलता को रेखांकित करती है और बाघ अभयारण्य के रूप में कॉर्बेट की स्थिति को मजबूत करती है। यह पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने और इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण है, जिससे स्थानीय समुदायों और राष्ट्रीय संरक्षण एजेंडे को लाभ होता है।
Home Exams Jobs Current Affairs Mock Tests