हरित हाइड्रोजन उत्पादन के लिए भारत का जोर गति पकड़ रहा है
2026-09-25पृष्ठभूमि: भारत ने नवीकरणीय ऊर्जा और कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किए हैं, जिसमें ग्रीन हाइड्रोजन को डीकार्बोनाइजेशन के लिए एक प्रमुख घटक के रूप में पहचाना गया है। घरेलू विनिर्माण और अपनाने को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन शुरू किया गया था।
वर्तमान संदर्भ: सितंबर 2026 तक, देश भर में हरित हाइड्रोजन उत्पादन सुविधाओं को बढ़ाने में महत्वपूर्ण प्रगति की सूचना मिली है। कई पायलट परियोजनाओं ने रिफाइनिंग, उर्वरक और परिवहन जैसे क्षेत्रों में हरित हाइड्रोजन के उपयोग की व्यवहार्यता को सफलतापूर्वक प्रदर्शित किया है। नीतिगत समर्थन और बढ़ती वैश्विक मांग से प्रेरित होकर सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों से निवेश लगातार बढ़ रहा है।
प्रभाव: हरित हाइड्रोजन उत्पादन में इस वृद्धि से भारत की जीवाश्म ईंधन आयात पर निर्भरता काफी कम होने, ऊर्जा सुरक्षा बढ़ने और स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में नए रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। यह भारत को हरित हाइड्रोजन प्रौद्योगिकी और निर्यात में एक संभावित वैश्विक नेता के रूप में भी स्थापित करता है।
भारतीय नौसेना ने नए स्टील्थ फ्रिगेट आईएनएस 'विंध्यगिरि' को कमीशन किया
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इसरो ने सफलतापूर्वक इनसैट-4डीएस उपग्रह का प्रक्षेपण किया
2026-09-25पृष्ठभूमि: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) भारत की उपग्रह संचार क्षमताओं को विकसित करने में महत्वपूर्ण रहा है। इनसैट उपग्रह इस नेटवर्क का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जो महत्वपूर्ण सेवाएं प्रदान करते हैं।
वर्तमान संदर्भ: 25 सितंबर 2026 को, इसरो ने सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा से जीएसएलवी एमके II रॉकेट का उपयोग करके इनसैट-4डीएस उपग्रह का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया। यह उन्नत उपग्रह इनसैट प्रणाली की क्षमता और प्रदर्शन को बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
प्रभाव: इनसैट-4डीएस भारत भर में संचार और प्रसारण सेवाओं, जिसमें टेलीविजन, रेडियो और डेटा ट्रांसमिशन शामिल हैं, को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाएगा। इसकी बेहतर पेलोड क्षमताएं बेहतर कनेक्टिविटी और डेटा गति सुनिश्चित करेंगी, जो आपदा प्रबंधन और दूरस्थ शिक्षा जैसे विभिन्न क्षेत्रों का समर्थन करेंगी।
सरकार ने नई निर्यात प्रोत्साहन योजना की घोषणा की
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आरबीआई की मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक संपन्न
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भारत के Q2 FY27 जीडीपी वृद्धि अनुमान जारी
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जी20 शिखर सम्मेलन में डिजिटल परिवर्तन एजेंडा पर सहमति
2026-09-25पृष्ठभूमि: डिजिटल परिवर्तन आधुनिक अर्थव्यवस्थाओं का एक प्रमुख चालक है, जो उत्पादकता, नवाचार और नागरिक सेवाओं को प्रभावित करता है। जी20 ने लगातार समावेशी डिजिटल विकास की आवश्यकता पर जोर दिया है।
वर्तमान संदर्भ: 25 सितंबर 2026 को संपन्न हुए जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान, सदस्य देशों ने 'ग्लोबल डिजिटल कोऑपरेशन फ्रेमवर्क' पर एक आम सहमति व्यक्त की। इस ढांचे का उद्देश्य इंटरऑपरेबल डिजिटल सिस्टम को बढ़ावा देना, साइबर सुरक्षा सहयोग बढ़ाना और विशेष रूप से विकासशील देशों के लिए डिजिटल प्रौद्योगिकियों तक समान पहुंच सुनिश्चित करना है। यह कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डेटा शासन के नैतिक निहितार्थों को भी संबोधित करता है।
प्रभाव: यह ढांचा नवाचार और आर्थिक प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देते हुए विश्व स्तर पर डिजिटल अपनाने में तेजी लाने के लिए तैयार है। उन्नत साइबर सुरक्षा उपाय महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की रक्षा करेंगे, जबकि डिजिटल विभाजन को पाटने के प्रयास हाशिए पर पड़े समुदायों को सशक्त बनाएंगे और डिजिटल समावेशन को बढ़ावा देंगे।
सतत विकास के प्रति मजबूत प्रतिबद्धताओं के साथ जी20 शिखर सम्मेलन संपन्न
2026-09-25पृष्ठभूमि: जी20 शिखर सम्मेलन प्रमुख विश्व अर्थव्यवस्थाओं के नेताओं के लिए महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करने हेतु एक वार्षिक मंच है। 2026 के शिखर सम्मेलन का उद्देश्य आर्थिक विकास और सतत विकास पर सहयोग को बढ़ावा देना था।
वर्तमान संदर्भ: 25 सितंबर 2026 को संपन्न हुए जी20 नेताओं ने सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) पर प्रगति में तेजी लाने के लिए एक व्यापक ढांचा 'ग्लोबल सस्टेनेबिलिटी अकॉर्ड' को अपनाया। इस समझौते में हरित वित्त को बढ़ावा देने, चक्रीय अर्थव्यवस्थाओं को बढ़ावा देने और जलवायु परिवर्तन शमन और अनुकूलन पर अंतर्राष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धताएं शामिल हैं।
प्रभाव: इस समझौते से वैश्विक स्तर पर समावेशी आर्थिक विकास को बढ़ावा देने और हरित रोजगार सृजित करने वाले सतत बुनियादी ढांचे और नवीकरणीय ऊर्जा में महत्वपूर्ण निवेश जुटाने की उम्मीद है। यह जलवायु परिवर्तन को संबोधित करने और अधिक न्यायसंगत दुनिया हासिल करने में जी20 की भूमिका को भी मजबूत करता है।