आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन का राष्ट्रव्यापी विस्तार
2026-06-21पृष्ठभूमि: राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन (अब आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन - ABDM) को एक राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के लिए शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य प्रत्येक नागरिक को एक डिजिटल स्वास्थ्य आईडी प्रदान करना है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं और रिकॉर्ड तक निर्बाध पहुंच सुनिश्चित हो सके। वर्तमान संदर्भ: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के एक महत्वपूर्ण विस्तार चरण की घोषणा की है, जिसका लक्ष्य 2026 के अंत तक सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सार्वभौमिक कवरेज प्राप्त करना है। यह चरण निजी स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को अधिक व्यापक रूप से एकीकृत करने और विभिन्न डिजिटल स्वास्थ्य प्लेटफार्मों, जैसे फार्मेसियों और नैदानिक प्रयोगशालाओं के बीच अंतरसंचालनीयता बढ़ाने पर केंद्रित है। प्रभाव: यह विस्तार स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच को सुव्यवस्थित करेगा, सार्वजनिक स्वास्थ्य पहलों के लिए डेटा प्रबंधन में सुधार करेगा और नागरिकों को उनके स्वास्थ्य रिकॉर्ड पर बेहतर नियंत्रण के साथ सशक्त करेगा। इससे टेलीमेडिसिन को बढ़ावा मिलने, प्रशासनिक बोझ कम होने और देश भर में अधिक कुशल, रोगी-केंद्रित स्वास्थ्य सेवा वितरण होने की उम्मीद है।
पर्यावरण प्रभाव आकलन प्रक्रिया पर सर्वोच्च न्यायालय का ऐतिहासिक निर्णय
2026-06-21पृष्ठभूमि: पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) प्रस्तावित परियोजनाओं के पर्यावरणीय परिणामों का निर्णय लेने से पहले मूल्यांकन करने की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। भारत की EIA अधिसूचना में इसकी प्रभावशीलता, पारदर्शिता और सार्वजनिक भागीदारी पहलुओं के संबंध में कई संशोधन और बहसें हुई हैं। वर्तमान संदर्भ: भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है, जिसमें सभी प्रमुख पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) मंजूरियों में सार्वजनिक परामर्श प्रक्रियाओं और स्वतंत्र विशेषज्ञ समीक्षाओं का कड़ाई से पालन अनिवार्य किया गया है। यह निर्णय पारदर्शिता, जवाबदेही और विशेष रूप से पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में परियोजनाओं के लिए संचयी प्रभावों पर विचार करने की आवश्यकता पर जोर देता है। प्रभाव: यह निर्णय पर्यावरणीय शासन को महत्वपूर्ण रूप से मजबूत करेगा, जिससे अधिक सार्वजनिक भागीदारी सुनिश्चित होगी और मनमानी मंजूरियां कम होंगी। इससे अधिक टिकाऊ विकास प्रथाओं, जैव विविधता के बेहतर संरक्षण और देश भर में पर्यावरण संरक्षण के प्रति बढ़ी हुई कॉर्पोरेट जिम्मेदारी को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जिससे विकास के लिए एक संतुलित दृष्टिकोण को बढ़ावा मिलेगा।