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राष्ट्रीय मामले: डिजिटल स्वास्थ्य, एससी ईआईए निर्णय, शहरी हरित नीति

आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) का टियर-2, टियर-3 शहरों में विस्तार
2026-05-15
पृष्ठभूमि: भारत ने एक मजबूत डिजिटल स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के उद्देश्य से आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) शुरू किया था, जिसका लक्ष्य स्वास्थ्य रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से जोड़ना है। वर्तमान संदर्भ: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने एबीडीएम के एक महत्वपूर्ण विस्तार चरण की घोषणा की है, जिसका लक्ष्य 2026 के अंत तक टियर-2 और टियर-3 शहरों में सभी सार्वजनिक और निजी स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को एकीकृत करना है। इसमें नागरिकों के लिए अनिवार्य डिजिटल स्वास्थ्य आईडी और इंटरऑपरेबल इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड शामिल हैं। प्रभाव: यह विस्तार स्वास्थ्य सेवा पहुंच को बढ़ाएगा, रोगी डेटा प्रबंधन को सुव्यवस्थित करेगा और वास्तविक समय के स्वास्थ्य विश्लेषण के आधार पर नीति निर्माण में सुधार करेगा, जिससे अंततः भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य अवसंरचना मजबूत होगी और सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज को बढ़ावा मिलेगा।
सर्वोच्च न्यायालय ने बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए कड़े ईआईए मानदंडों को अनिवार्य किया
2026-05-15
पृष्ठभूमि: बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए पर्यावरण मंजूरी अक्सर विवाद का विषय रही है, जिसमें तीव्र विकास और पारिस्थितिक संरक्षण के बीच संतुलन बनाना होता है। वर्तमान संदर्भ: भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है, जिसमें सभी प्रमुख औद्योगिक और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए पर्यावरण प्रभाव आकलन (ईआईए) मानदंडों का कड़ाई से पालन अनिवार्य किया गया है। इस फैसले में मजबूत सार्वजनिक परामर्श और स्वतंत्र विशेषज्ञ समीक्षाओं पर जोर दिया गया है, जिससे परियोजनाओं के लिए पारिस्थितिक सुरक्षा उपायों को दरकिनार करना कठिन हो जाएगा। प्रभाव: इस निर्णय से पर्यावरण शासन को काफी मजबूती मिलने, जैव विविधता की रक्षा करने और देश भर में सतत विकास प्रथाओं को सुनिश्चित करने की उम्मीद है, जिससे कुछ बड़े पैमाने की परियोजनाओं में देरी या पुनर्रचना हो सकती है।
राष्ट्रीय शहरी हरित अवसंरचना नीति 2026 का अनावरण
2026-05-15
पृष्ठभूमि: भारत में तेजी से शहरीकरण के कारण शहरी हरित स्थानों में उल्लेखनीय कमी आई है, जिससे जैव विविधता, वायु गुणवत्ता और समग्र शहरी जीवन क्षमता प्रभावित हुई है। वर्तमान संदर्भ: आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने "राष्ट्रीय शहरी हरित अवसंरचना नीति 2026" का अनावरण किया है, जो भारतीय शहरों में हरित स्थानों के निर्माण और रखरखाव को बढ़ावा देने के लिए एक व्यापक ढांचा है। इसमें शहरी वानिकी, वर्टिकल गार्डन, ग्रीन रूफ और हरित पहलों को अपनाने के लिए स्थानीय निकायों को प्रोत्साहित करने के दिशानिर्देश शामिल हैं। प्रभाव: इस नीति का उद्देश्य शहरी वायु गुणवत्ता में सुधार करना, शहरी ताप द्वीप प्रभाव को कम करना, सार्वजनिक स्वास्थ्य को बढ़ाना और पर्यावरण संरक्षण में सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देना है, जिससे अधिक रहने योग्य और टिकाऊ शहरों का निर्माण होगा।
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