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भारत के राष्ट्रीय मामले: डिजिटल स्वास्थ्य, SC निर्देश, सिविल सेवा सुधार

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन के विस्तार को मंजूरी दी
2026-05-13
पृष्ठभूमि: भारत ने आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) को एक डिजिटल स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के लिए शुरू किया था। इसके शुरुआती चरणों में स्वास्थ्य आईडी और रजिस्ट्रियां बनाने पर ध्यान केंद्रित किया गया था। वर्तमान संदर्भ: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अपनी हालिया बैठक में राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन के महत्वपूर्ण विस्तार को मंजूरी दी है, जिसमें अधिक सार्वजनिक और निजी स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को एकीकृत किया जाएगा और सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में उन्नत टेलीमेडिसिन तथा एआई-संचालित नैदानिक ​​सहायता शुरू की जाएगी। इसका उद्देश्य पहुंच और दक्षता बढ़ाना है। प्रभाव: इस विस्तार से स्वास्थ्य सेवा वितरण में क्रांति आने की उम्मीद है, जिससे मेडिकल रिकॉर्ड सार्वभौमिक रूप से सुलभ होंगे और रोगी देखभाल समन्वय में सुधार होगा। यह स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी में नवाचार को भी बढ़ावा देगा, जिससे संभावित रूप से स्वास्थ्य सेवा लागत कम होगी और लाखों नागरिकों, विशेषकर दूरदराज के क्षेत्रों में, स्वास्थ्य परिणामों में सुधार होगा।
सर्वोच्च न्यायालय ने बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए पर्यावरणीय मंजूरी में तेजी लाने का निर्देश दिया
2026-05-13
पृष्ठभूमि: पर्यावरणीय मंजूरी में देरी से अक्सर महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाएं बाधित होती रही हैं, जिससे लागत में वृद्धि होती है और आर्थिक विकास में बाधा आती है। विभिन्न राज्य और केंद्रीय एजेंसियां बहु-स्तरीय अनुमोदन प्रक्रिया में शामिल होती हैं। वर्तमान संदर्भ: सर्वोच्च न्यायालय ने एक ऐतिहासिक फैसले में सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को राष्ट्रीय महत्व की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए छह महीने के भीतर पर्यावरणीय मंजूरी हेतु फास्ट-ट्रैक तंत्र स्थापित करने का निर्देश दिया है। न्यायालय ने विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने पर जोर दिया। प्रभाव: इस निर्देश से राजमार्गों, रेलवे और नवीकरणीय ऊर्जा संयंत्रों जैसी प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के निष्पादन में उल्लेखनीय तेजी आने की उम्मीद है, जिससे आर्थिक विकास और रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा। इसका उद्देश्य कुशल निगरानी के माध्यम से पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों का पालन सुनिश्चित करते हुए नौकरशाही प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करना भी है।
कार्मिक मंत्रालय ने सिविल सेवाओं के लिए 'मिशन कर्मयोगी 2.0' लॉन्च किया
2026-05-13
पृष्ठभूमि: मिशन कर्मयोगी को सिविल सेवा क्षमता निर्माण को बदलने के लिए शुरू किया गया था, जिसमें नियम-आधारित से भूमिका-आधारित प्रशिक्षण की ओर बढ़ना शामिल था। इसके शुरुआती चरण में मूलभूत प्रशिक्षण और डिजिटल शिक्षण प्लेटफार्मों पर ध्यान केंद्रित किया गया था। वर्तमान संदर्भ: कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय ने 'मिशन कर्मयोगी 2.0' का अनावरण किया है, जो सिविल सेवकों के लिए विशेष कौशल विकास, नेतृत्व प्रशिक्षण और प्रदर्शन-आधारित प्रोत्साहन पर केंद्रित एक उन्नत चरण है। यह पुनरावृति उभरती शासन चुनौतियों के अनुकूल निरंतर सीखने और अनुकूलनशीलता पर जोर देती है। प्रभाव: इस पहल से भारतीय नौकरशाही की दक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है। निरंतर सीखने और प्रदर्शन की संस्कृति को बढ़ावा देकर, इसका उद्देश्य सार्वजनिक सेवा वितरण में सुधार करना, शासन को मजबूत करना और सिविल सेवकों को जटिल नीतिगत मुद्दों तथा नागरिक आवश्यकताओं को प्रभावी ढंग से संबोधित करने के लिए बेहतर ढंग से तैयार करना है।
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