संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सुधार पर चर्चा तेज
2026-05-24पृष्ठभूमि: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार की मांग दशकों से बनी हुई है, जिसका उद्देश्य समकालीन भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करना है। भारत सहित कई राष्ट्र, अपने बढ़ते वैश्विक प्रभाव और योगदान का हवाला देते हुए स्थायी सदस्यता की वकालत करते हैं। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद स्थापित वर्तमान संरचना की अक्सर सीमित प्रतिनिधित्व और वीटो शक्ति गतिशीलता के लिए आलोचना की जाती है। वर्तमान संदर्भ: मई 2026 के अंत में, संयुक्त राष्ट्र महासभा में उच्च-स्तरीय परामर्शों के एक नए दौर में UNSC विस्तार के लिए नई गति देखी गई। कई सदस्य देशों ने नए स्थायी और गैर-स्थायी सदस्यों को जोड़ने के लिए एक रूपरेखा का प्रस्ताव प्रस्तुत किया, जिसमें समान भौगोलिक वितरण और विकासशील राष्ट्रों के लिए बढ़े हुए प्रतिनिधित्व पर जोर दिया गया। प्रभाव: यदि सफल होता है, तो ये सुधार शांति और सुरक्षा से लेकर जलवायु परिवर्तन तक वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने में UNSC की वैधता और प्रभावशीलता को बढ़ा सकते हैं। हालांकि, वीटो शक्ति और विस्तारित परिषद की विशिष्ट संरचना के संबंध में महत्वपूर्ण बाधाएं बनी हुई हैं, जिसके लिए मौजूदा स्थायी सदस्यों के बीच आम सहमति की आवश्यकता होगी।
G7 देशों ने नए वैश्विक अवसंरचना कोष की घोषणा की
2026-05-24पृष्ठभूमि: विकसित देश चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने के लिए विकासशील देशों को वैकल्पिक अवसंरचना विकास वित्तपोषण की पेशकश कर रहे हैं। बिल्ड बैक बेटर वर्ल्ड (B3W) जैसी पिछली पहलें कार्यान्वयन चुनौतियों का सामना कर चुकी थीं। वर्तमान संदर्भ: मई 2026 के अंत में अपने शिखर सम्मेलन के बाद, G7 नेताओं ने एक काफी विस्तारित "वैश्विक अवसंरचना साझेदारी" कोष का अनावरण किया। इस नई बहु-अरब डॉलर की पहल का उद्देश्य निम्न और मध्यम आय वाले देशों में टिकाऊ, उच्च-गुणवत्ता वाली अवसंरचना परियोजनाओं को वित्तपोषित करना है, जिसमें डिजिटल कनेक्टिविटी, स्वच्छ ऊर्जा और स्वास्थ्य अवसंरचना पर ध्यान केंद्रित किया गया है, साथ ही पारदर्शिता और पर्यावरणीय मानकों पर भी जोर दिया गया है। प्रभाव: इस कोष से वैश्विक अवसंरचना विकास को बहुत आवश्यक बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जो देशों को ऋण-जाल कूटनीति का एक व्यवहार्य विकल्प प्रदान करेगा। यह G7 राष्ट्रों और प्राप्तकर्ता देशों के बीच आर्थिक संबंधों को भी मजबूत कर सकता है, जिससे सतत विकास को बढ़ावा मिलेगा और एक नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।