भारत-आसियान शिखर सम्मेलन समुद्री सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करते हुए संपन्न
2026-04-17पृष्ठभूमि: दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्रों का संगठन (आसियान) एक प्रमुख क्षेत्रीय संगठन है जिसके साथ भारत के मजबूत आर्थिक और रणनीतिक संबंध हैं। भारत 1992 से आसियान का संवाद भागीदार रहा है।
वर्तमान संदर्भ: 15 अप्रैल, 2026 को वर्चुअली आयोजित 34वें आसियान शिखर सम्मेलन में नेताओं ने समुद्री सुरक्षा में सहयोग बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की। चर्चाओं में समुद्री डकैती, अवैध मछली पकड़ने से निपटने और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए संयुक्त पहलों पर ध्यान केंद्रित किया गया। भारत के विदेश मंत्री ने नियम-आधारित व्यवस्था और सहयोगात्मक दृष्टिकोण के महत्व पर प्रकाश डाला।
प्रभाव: शिखर सम्मेलन के परिणाम से भारत की एक्ट ईस्ट नीति को मजबूती मिलने और आसियान देशों के साथ उसकी भागीदारी बढ़ने की उम्मीद है। बढ़ी हुई समुद्री सुरक्षा सहयोग क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक समृद्धि में योगदान देगा, जिससे व्यापार और कनेक्टिविटी को लाभ होगा।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने वैश्विक खाद्य सुरक्षा पर प्रस्ताव अपनाया
2026-04-17पृष्ठभूमि: वैश्विक खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना एक स्थायी चुनौती है, जो जलवायु परिवर्तन, संघर्षों और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधानों से और बढ़ जाती है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद समय-समय पर महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों को संबोधित करती है।
वर्तमान संदर्भ: 16 अप्रैल, 2026 को, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने भूख और कुपोषण से निपटने के लिए अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों को मजबूत करने के उद्देश्य से एक प्रस्ताव को सर्वसम्मति से अपनाया। प्रस्ताव में सतत कृषि में निवेश बढ़ाने, कमजोर आबादी के लिए भोजन तक पहुंच में सुधार करने और खाद्य वितरण में बाधा डालने वाले व्यापार अवरोधों को दूर करने का आह्वान किया गया है। यह सदस्य देशों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों द्वारा समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर देता है।
प्रभाव: यह प्रस्ताव खाद्य असुरक्षा के मूल कारणों को संबोधित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे अधिक प्रभावी हस्तक्षेपों के लिए संसाधनों और राजनीतिक इच्छाशक्ति को जुटाने की उम्मीद है, जिससे लाखों लोग भुखमरी से बच सकते हैं और विश्व स्तर पर दीर्घकालिक कृषि लचीलापन में सुधार हो सकता है।
वैश्विक जलवायु शिखर सम्मेलन ने उत्सर्जन कटौती लक्ष्यों में तेजी लाने का वादा किया
2026-04-17पृष्ठभूमि: जलवायु परिवर्तन एक गंभीर वैश्विक खतरा बना हुआ है, जिसके लिए सभी देशों से तत्काल और महत्वाकांक्षी कार्रवाई की आवश्यकता है। अंतर्राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन जलवायु लक्ष्यों को निर्धारित करने के लिए महत्वपूर्ण मंच हैं।
वर्तमान संदर्भ: 'क्लाइमेट एक्शन 2026' शिखर सम्मेलन, जो 17 अप्रैल, 2026 को समाप्त हुआ, में 150 से अधिक देशों ने अपने उत्सर्जन कटौती लक्ष्यों में तेजी लाने पर सहमति व्यक्त की। भाग लेने वाले देशों ने 2040 तक कोयला बिजली को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने और अगले पांच वर्षों में नवीकरणीय ऊर्जा निवेश में 30% की वृद्धि करने का वचन दिया। विकासशील देशों को उनके संक्रमण में सहायता के लिए एक नया ग्रीन क्लाइमेट फंड भी स्थापित किया गया।
प्रभाव: वैश्विक तापन को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने के लिए यह नवीनीकृत वैश्विक प्रतिबद्धता महत्वपूर्ण है। त्वरित लक्ष्यों और बढ़े हुए धन से हरित प्रौद्योगिकियों में नवाचार को बढ़ावा मिलने और अधिक टिकाऊ वैश्विक अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, हालांकि कार्यान्वयन की चुनौतियां बनी हुई हैं।