प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना 4.0 का भविष्योन्मुखी कौशल और हरित नौकरियों पर विस्तार
2026-05-16पृष्ठभूमि: प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) अपनी स्थापना के बाद से भारत के युवाओं को कुशल बनाने में महत्वपूर्ण रही है, जिसके पिछले चरणों ने विभिन्न औद्योगिक मांगों को पूरा किया है। इसका उद्देश्य बड़ी संख्या में भारतीय युवाओं को बाजार-प्रासंगिक कौशल प्रशिक्षण प्रदान करना है।
वर्तमान संदर्भ: 16 मई, 2026 को कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय ने पीएमकेवीवाई 4.0 के एक बड़े विस्तार की घोषणा की। यह चरण विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स, नवीकरणीय ऊर्जा प्रौद्योगिकियों और ड्रोन संचालन जैसे भविष्य के लिए तैयार कौशलों पर केंद्रित होगा। इस पहल का लक्ष्य 2028 तक 5 मिलियन से अधिक युवाओं को प्रशिक्षित करना है, जिसमें उन्नत पाठ्यक्रम और उद्योग सहयोग शामिल होंगे।
प्रभाव: इस विस्तार से उभरते क्षेत्रों में युवाओं की रोजगार क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होने, कौशल अंतराल को कम करने और भारत को ज्ञान-आधारित तथा हरित अर्थव्यवस्था की ओर संक्रमण में सहायता मिलने की उम्मीद है। यह कुशल कार्यबल तैयार करके 'मेक इन इंडिया' और 'डिजिटल इंडिया' अभियानों को भी मजबूत करेगा।
ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान (जीडीएसए) का दूसरा चरण उन्नत डिजिटल साक्षरता के लिए शुरू
2026-05-16पृष्ठभूमि: ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान (जीडीएसए) ग्रामीण परिवारों को बुनियादी डिजिटल साक्षरता प्रदान करके डिजिटल विभाजन को पाटने के लिए शुरू किया गया था। इसके पिछले चरणों ने देश भर में लाखों लोगों को कंप्यूटर और इंटरनेट के मूलभूत उपयोग से सफलतापूर्वक परिचित कराया।
वर्तमान संदर्भ: 15 मई, 2026 को ग्रामीण विकास मंत्रालय ने जीडीएसए के दूसरे चरण का शुभारंभ किया, जो उन्नत डिजिटल कौशल पर केंद्रित है। इस चरण का उद्देश्य ग्रामीण नागरिकों को साइबर सुरक्षा, ऑनलाइन वित्तीय लेनदेन, ई-गवर्नेंस सेवाओं के उपयोग और बुनियादी डिजिटल उद्यमिता के ज्ञान से लैस करना है। यह कार्यक्रम 3 मिलियन लाभार्थियों को लक्षित करता है, जिसमें महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों पर विशेष जोर दिया गया है।
प्रभाव: जीडीएसए चरण II ग्रामीण समुदायों को सशक्त करेगा, डिजिटल अर्थव्यवस्था में उनकी भागीदारी बढ़ाएगा और आवश्यक सरकारी सेवाओं तक पहुंच में सुधार करेगा। इससे अधिक वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिलने और साइबर धोखाधड़ी के प्रति संवेदनशीलता कम होने की उम्मीद है, जिससे समग्र ग्रामीण विकास में योगदान मिलेगा।