राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ने 'प्रजाति पुन:प्रवेश कार्यक्रम' शुरू किया
2026-07-28पृष्ठभूमि: राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) जैविक विविधता अधिनियम, 2002 के तहत स्थापित एक सांविधिक और संवैधानिक निकाय है, जिसका उद्देश्य भारत की नागोया प्रोटोकॉल प्रतिबद्धताओं को लागू करना है। इसका लक्ष्य जैव विविधता का संरक्षण करना और इसके सतत उपयोग को बढ़ावा देना है।
वर्तमान संदर्भ: जुलाई 2026 के अंत में, NBA ने स्थानीय रूप से विलुप्त या गंभीर रूप से संकटग्रस्त प्रजातियों को उनके प्राकृतिक आवासों में वापस लाने के उद्देश्य से एक नए 'प्रजाति पुन:प्रवेश कार्यक्रम' के शुभारंभ की घोषणा की। यह कार्यक्रम शुरू में ग्रेट इंडियन बस्टर्ड और मणिपुर ब्रो-एंटलर्ड डियर (संगाई) जैसी प्रमुख प्रजातियों पर ध्यान केंद्रित करेगा।
प्रभाव: इस पहल से संरक्षण प्रयासों को महत्वपूर्ण बढ़ावा मिलने, प्रभावित क्षेत्रों में पारिस्थितिक संतुलन बहाल होने और वैश्विक जैव विविधता लक्ष्यों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता बढ़ने की उम्मीद है। इसका उद्देश्य प्रजातियों के संरक्षण के महत्व के बारे में जन जागरूकता बढ़ाना भी है।
2026 में नए राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभयारण्य नामित
2026-07-28पृष्ठभूमि: भारत में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत प्रबंधित राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभयारण्यों सहित संरक्षित क्षेत्रों का एक विशाल नेटवर्क है, जो वनस्पतियों और जीवों की सुरक्षा के लिए है। ये क्षेत्र पारिस्थितिक अखंडता बनाए रखने और वन्यजीवों के लिए सुरक्षित आश्रय प्रदान करने हेतु महत्वपूर्ण हैं।
वर्तमान संदर्भ: जुलाई 2026 तक, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने विभिन्न राज्यों में तीन नए राष्ट्रीय उद्यानों और पांच नए वन्यजीव अभयारण्यों को आधिकारिक तौर पर नामित किया है। इन नए पदनामों का उद्देश्य हिमालय में हिम तेंदुए और तट पर ओलिव रिडले कछुओं सहित लुप्तप्राय प्रजातियों के लिए पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों और महत्वपूर्ण आवासों की रक्षा करना है।
प्रभाव: संरक्षित क्षेत्रों के विस्तार से आवास कनेक्टिविटी बढ़ेगी, मानव-वन्यजीव संघर्ष कम होगा, और कमजोर प्रजातियों के दीर्घकालिक अस्तित्व में योगदान मिलेगा। यह संरक्षण प्रयासों में भारत की स्थिति को भी मजबूत करता है और इको-टूरिज्म के अवसर प्रदान करता है।