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पर्यावरण और पारिस्थितिकी: भारत की हरित पहल और जैव विविधता

2030 तक 500 GW नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के लिए भारत का जोर
2026-07-20
पृष्ठभूमि: भारत अपनी बढ़ती ऊर्जा मांगों और जलवायु प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का आक्रामक रूप से पीछा कर रहा है। देश ने सौर और पवन ऊर्जा उत्पादन के लिए महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किए हैं। वर्तमान संदर्भ: जुलाई 2026 तक, भारत ने अपनी नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता लक्ष्य का लगभग 450 GW हासिल कर लिया है, जिसमें सौर और पवन ऊर्जा का महत्वपूर्ण योगदान है। सरकार शेष अंतर को पाटने के लिए प्रयासों में तेजी ला रही है, जिसमें ग्रिड एकीकरण, ऊर्जा भंडारण समाधान और नई परियोजनाओं के लिए नीतिगत समर्थन पर ध्यान केंद्रित किया गया है। प्रभाव: यह विस्तार भारत के कार्बन फुटप्रिंट को कम करने, ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने और हरित रोजगार सृजन के माध्यम से आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण है। यह भारत को नवीकरणीय ऊर्जा अपनाने में एक वैश्विक नेता के रूप में भी स्थापित करता है।
'महानंदा वन्यजीव अभयारण्य' विस्तार को नया राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा
2026-07-20
पृष्ठभूमि: भारत के संरक्षित क्षेत्रों का नेटवर्क, जिसमें राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभयारण्य शामिल हैं, जैव विविधता और प्राकृतिक आवासों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ये क्षेत्र लुप्तप्राय प्रजातियों के अस्तित्व के लिए महत्वपूर्ण हैं। वर्तमान संदर्भ: जुलाई 2026 के मध्य में, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल में महानंदा वन्यजीव अभयारण्य के विस्तार की घोषणा की, जिसका एक महत्वपूर्ण हिस्सा अब राष्ट्रीय उद्यान के रूप में नामित किया गया है। इस कदम का उद्देश्य बंगाल टाइगर और लाल पांडा सहित क्षेत्र के समृद्ध वनस्पतियों और जीवों को बढ़ी हुई सुरक्षा प्रदान करना है। प्रभाव: राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा मिलने से सख्त संरक्षण नियम, बढ़ा हुआ धन और अनुसंधान व अवैध शिकार विरोधी गतिविधियों के लिए बेहतर बुनियादी ढांचा उपलब्ध होगा। इससे पूर्वी हिमालय में स्थानिक प्रजातियों और उनके आवासों के संरक्षण प्रयासों को महत्वपूर्ण बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
जलवायु कार्रवाई के लिए भारत का अद्यतन राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDCs)
2026-07-20
पृष्ठभूमि: राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDCs) पेरिस समझौते के तहत देशों द्वारा प्रस्तुत जलवायु कार्रवाई लक्ष्य हैं। भारत ने लगातार महत्वाकांक्षी जलवायु लक्ष्यों के प्रति प्रतिबद्धता दिखाई है। वर्तमान संदर्भ: जुलाई 2026 की शुरुआत में, भारत ने UNFCCC को अपने अद्यतन NDCs प्रस्तुत किए, जिसमें 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन प्राप्त करने और 2030 तक अपनी गैर-जीवाश्म ईंधन ऊर्जा क्षमता को 60% तक बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की गई। अद्यतन NDCs में कार्बन सिंक वृद्धि और जलवायु लचीलापन के लिए बढ़ी हुई लक्ष्य भी शामिल हैं। प्रभाव: ये अद्यतन NDCs जलवायु परिवर्तन पर भारत के सक्रिय रुख को प्रदर्शित करते हैं, जो इसके विकास लक्ष्यों को वैश्विक पर्यावरणीय अनिवार्यता के साथ संरेखित करते हैं। यह अंतर्राष्ट्रीय जलवायु वार्ताओं को मजबूत करता है और भारत के भीतर हरित प्रौद्योगिकियों और टिकाऊ प्रथाओं में और अधिक निवेश को प्रोत्साहित करता है।
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