भारत ने महत्वाकांक्षी मैंग्रोव संरक्षण योजना शुरू की
2026-06-25पृष्ठभूमि: मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र तटीय सुरक्षा, कार्बन पृथक्करण और विविध समुद्री जीवन के लिए महत्वपूर्ण हैं। भारत में विशेष रूप से पूर्वी और पश्चिमी तटों पर महत्वपूर्ण मैंग्रोव आवरण है, लेकिन ये महत्वपूर्ण आवास जलवायु परिवर्तन, तटीय विकास और प्रदूषण से तेजी से खतरे में हैं। वर्तमान संदर्भ: 24 जून, 2026 को पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने "राष्ट्रीय मैंग्रोव संरक्षण और बहाली योजना 2026-2030" का अनावरण किया। यह महत्वाकांक्षी पांच वर्षीय योजना व्यापक वनीकरण, समुदाय-नेतृत्व वाले संरक्षण और उन्नत निगरानी प्रौद्योगिकियों के माध्यम से भारत के मैंग्रोव आवरण में 15% वृद्धि का लक्ष्य रखती है। प्रभाव: इस योजना से चरम मौसमी घटनाओं के खिलाफ तटीय लचीलेपन में उल्लेखनीय वृद्धि होने, जैव विविधता की रक्षा करने और इन पारिस्थितिकी तंत्रों पर निर्भर लाखों लोगों की आजीविका में सुधार होने की उम्मीद है। यह जलवायु कार्रवाई और अपने पारिस्थितिक बहाली लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।
'ग्रीन सिटीज मिशन' का दूसरा चरण शहरी हरियाली के लिए शुरू
2026-06-25पृष्ठभूमि: भारत में तेजी से शहरीकरण के कारण शहरी हरित स्थानों में कमी आई है, जिससे वायु प्रदूषण, हीट आइलैंड प्रभाव और जैव विविधता में कमी आई है। इसे पहचानते हुए, सरकार ने सतत शहरी विकास को बढ़ावा देने और पारिस्थितिक स्वास्थ्य को बढ़ाने के लिए 'ग्रीन सिटीज मिशन' शुरू किया था। वर्तमान संदर्भ: 25 जून, 2026 को आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सहयोग से, 'ग्रीन सिटीज मिशन' के दूसरे चरण का शुभारंभ किया। यह चरण 50 अतिरिक्त शहरों तक विस्तारित होगा, जिसमें व्यापक शहरी वन विकसित करने, हरित गलियारे बनाने और 5,000 करोड़ रुपये के पर्याप्त बजट के साथ सतत भू-दृश्य को एकीकृत करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। प्रभाव: इस विस्तार से शहरी वायु गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होगा, शहरी हीट आइलैंड प्रभाव कम होगा और शहरी जैव विविधता को बढ़ावा मिलेगा। यह महत्वपूर्ण मनोरंजक स्थान भी प्रदान करेगा, सार्वजनिक स्वास्थ्य और कल्याण को बढ़ावा देगा, और देश भर में पर्यावरण के प्रति जागरूक शहरी नियोजन के लिए एक मॉडल के रूप में कार्य करेगा।