भारत ने राष्ट्रीय मैंग्रोव बहाली पहल शुरू की
2026-06-23पृष्ठभूमि: मैंग्रोव महत्वपूर्ण तटीय पारिस्थितिकी तंत्र हैं, जो कटाव से बचाते हैं, जैव विविधता का समर्थन करते हैं और कार्बन सिंक का कार्य करते हैं। भारत की तटरेखा जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति संवेदनशील है। वर्तमान संदर्भ: 23 जून, 2026 को पर्यावरण मंत्रालय ने "राष्ट्रीय मैंग्रोव बहाली पहल" (NMRI) शुरू की। इसका उद्देश्य 10 तटीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मैंग्रोव आवरण को बहाल करना और बढ़ाना है, जिसमें degraded क्षेत्रों और सामुदायिक भागीदारी पर जोर है। प्रभाव: NMRI से तटीय लचीलापन बढ़ेगा, समुदायों को अत्यधिक मौसम से सुरक्षा मिलेगी, समुद्री जैव विविधता में सुधार होगा और भारत के कार्बन पृथक्करण लक्ष्यों में योगदान मिलेगा। यह स्थायी आजीविका को भी बढ़ावा देगा।
ई-कचरा प्रबंधन नीति फ्रेमवर्क 2.0 का अनावरण
2026-06-23पृष्ठभूमि: भारत में भारी इलेक्ट्रॉनिक कचरा उत्पन्न होता है, जिससे अनुचित निपटान के कारण पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी खतरे हैं। मौजूदा नियमों को लागू करने में चुनौतियां थीं। वर्तमान संदर्भ: 22 जून, 2026 को पर्यावरण मंत्रालय ने "ई-कचरा प्रबंधन नीति फ्रेमवर्क 2.0" पेश किया। यह नीति विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) के सख्त लक्ष्य निर्धारित करती है, ई-कचरे के लिए डिजिटल ट्रैकिंग शुरू करती है और औपचारिक रीसाइक्लिंग क्षेत्रों को प्रोत्साहित करती है। प्रभाव: नए फ्रेमवर्क का उद्देश्य ई-कचरा संग्रह और रीसाइक्लिंग को सुव्यवस्थित करना, खतरनाक सामग्रियों से प्रदूषण कम करना, इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना और हरित रोजगार सृजित करना है। यह स्थायी संसाधन प्रबंधन हेतु महत्वपूर्ण है।