भारत ने राष्ट्रीय मैंग्रोव बहाली मिशन का शुभारंभ किया
2026-06-22पृष्ठभूमि: मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र महत्वपूर्ण तटीय अवरोधक हैं, जो कटाव, तूफान और समुद्री जीवन के लिए आवास प्रदान करते हैं। भारत में महत्वपूर्ण मैंग्रोव आवरण है, लेकिन यह शहरीकरण, औद्योगिक विकास और जलवायु परिवर्तन से खतरे में है। पिछले प्रयास स्थानीयकृत रहे हैं। वर्तमान संदर्भ: 20 जून, 2026 को पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने "राष्ट्रीय मैंग्रोव बहाली मिशन" (NMRM) का शुभारंभ किया। इस महत्वाकांक्षी पांच-वर्षीय कार्यक्रम का लक्ष्य 10 तटीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मैंग्रोव आवरण को बहाल करना और उसका विस्तार करना है, जिसमें degraded क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा और सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा दिया जाएगा। प्रभाव: इस मिशन से तटीय लचीलापन बढ़ने, स्थायी इकोटूरिज्म और मत्स्य पालन के माध्यम से स्थानीय समुदायों की आजीविका में सुधार होने और भारत के कार्बन पृथक्करण लक्ष्यों में महत्वपूर्ण योगदान मिलने की उम्मीद है। यह भारतीय तटरेखा पर जैव विविधता संरक्षण को भी मजबूत करेगा।
पश्चिमी घाट के लिए सतत इकोटूरिज्म नीति ढाँचा जारी
2026-06-22पृष्ठभूमि: पश्चिमी घाट, एक यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल, एक वैश्विक जैव विविधता हॉटस्पॉट है जो अनियमित पर्यटन, वनों की कटाई और बुनियादी ढाँचे के विकास से भारी दबाव का सामना कर रहा है। पिछली इकोटूरिज्म पहलों में अक्सर व्यापक नियामक ढाँचे की कमी थी, जिससे पारिस्थितिक गिरावट हुई। वर्तमान संदर्भ: पर्यटन मंत्रालय ने पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सहयोग से 21 जून, 2026 को "पश्चिमी घाट के लिए सतत इकोटूरिज्म नीति ढाँचा" का अनावरण किया। यह नीति समुदाय-आधारित पर्यटन, सख्त पर्यावरणीय प्रभाव आकलन और संरक्षण के लिए राजस्व साझाकरण पर जोर देती है। प्रभाव: इस ढाँचे का उद्देश्य जिम्मेदार पर्यटन प्रथाओं को बढ़ावा देना, पश्चिमी घाट के नाजुक पारिस्थितिक तंत्रों की रक्षा करना और स्थानीय समुदायों को उनकी प्राकृतिक विरासत के संरक्षक के रूप में सशक्त बनाना है। इससे अन्य पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में स्थायी पर्यटन विकास के लिए एक मॉडल तैयार होने की उम्मीद है।