2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन के लिए भारत की प्रतिबद्धता
2026-06-20पृष्ठभूमि: भारत, एक प्रमुख विकासशील अर्थव्यवस्था, आर्थिक विकास और जलवायु परिवर्तन शमन की दोहरी चुनौती का सामना कर रहा है। अपनी वैश्विक जिम्मेदारी को पहचानते हुए, भारत ने महत्वाकांक्षी जलवायु लक्ष्य निर्धारित किए हैं।
वर्तमान संदर्भ: COP26 में, भारत ने 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन प्राप्त करने का संकल्प लिया। इस प्रतिबद्धता में नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की ओर एक महत्वपूर्ण परिवर्तन, ऊर्जा दक्षता में सुधार और टिकाऊ औद्योगिक प्रथाओं को अपनाना शामिल है। सरकार सक्रिय रूप से सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहनों और हरित हाइड्रोजन को बढ़ावा दे रही है।
प्रभाव: इस दीर्घकालिक लक्ष्य के लिए महत्वपूर्ण नीतिगत सुधारों, तकनीकी प्रगति और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता है। इसका उद्देश्य भारत के कार्बन फुटप्रिंट को कम करना, ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाना और वैश्विक जलवायु स्थिरता में योगदान देना है, साथ ही हरित क्षेत्रों में नए आर्थिक अवसरों को बढ़ावा देना है।
हरित हाइड्रोजन के लिए राष्ट्रीय मिशन से नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा
2026-06-20पृष्ठभूमि: जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने और जलवायु परिवर्तन से लड़ने के लिए वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य स्वच्छ विकल्पों की ओर बढ़ रहा है। हरित हाइड्रोजन, जो नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग करके उत्पादित की जाती है, को एक प्रमुख समाधान के रूप में देखा जा रहा है।
वर्तमान संदर्भ: भारत के राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन, जिसे महत्वपूर्ण वित्तीय परिव्यय के साथ लॉन्च किया गया है, का उद्देश्य देश को हरित हाइड्रोजन उत्पादन और निर्यात के लिए एक वैश्विक केंद्र बनाना है। यह स्वदेशी इलेक्ट्रोलाइज़र विनिर्माण क्षमता विकसित करने, अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देने और रिफाइनिंग, उर्वरक और परिवहन जैसे क्षेत्रों में हरित हाइड्रोजन की मांग पैदा करने पर केंद्रित है।
प्रभाव: इस मिशन से भारत की आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता काफी कम होने, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी आने और पर्याप्त रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। यह भारत के शुद्ध-शून्य लक्ष्यों के अनुरूप है और देश को उभरती हुई हरित हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था में एक अग्रणी के रूप में स्थापित करता है।
बाघ जनगणना से संरक्षित क्षेत्रों में आबादी में वृद्धि का खुलासा
2026-06-20पृष्ठभूमि: बाघ शीर्ष शिकारी हैं जो पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण हैं। उनका संरक्षण भारत के लिए प्राथमिकता है, जो दुनिया की बाघ आबादी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभयारण्यों के भीतर विभिन्न संरक्षण प्रयास किए जाते हैं।
वर्तमान संदर्भ: नवीनतम अखिल भारतीय बाघ अनुमान रिपोर्ट भारत के संरक्षित क्षेत्रों में बाघों की आबादी में लगातार वृद्धि का संकेत देती है। इस वृद्धि का श्रेय प्रभावी संरक्षण रणनीतियों, बढ़ी हुई गश्त, आवास सुधार और अवैध शिकार विरोधी प्रयासों में सामुदायिक भागीदारी को दिया जाता है। विशिष्ट आरक्षित वनों ने उल्लेखनीय सुधार दिखाया है।
प्रभाव: बाघों की बढ़ती संख्या सफल संरक्षण पहलों और बेहतर आवास स्थितियों का प्रतीक है। यह जैव विविधता संरक्षण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है और वन्यजीव संरक्षण में एक वैश्विक नेता के रूप में उसकी स्थिति को पुष्ट करता है। हालांकि, यह आवास विखंडन और मानव-वन्यजीव संघर्ष के खिलाफ निरंतर सतर्कता की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है।