भारत ने राष्ट्रीय तटीय लचीलापन मिशन शुरू किया
2026-06-19पृष्ठभूमि: भारत की विशाल तटरेखा समुद्र-स्तर में वृद्धि, तूफान और तटीय कटाव जैसे जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है, जिससे आजीविका और पारिस्थितिकी तंत्र खतरे में हैं। पिछले प्रयास अक्सर स्थानीयकृत थे। वर्तमान संदर्भ: 18 जून, 2026 को पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने "राष्ट्रीय तटीय लचीलापन मिशन 2030" का शुभारंभ किया। इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम का उद्देश्य जलवायु अनुकूलन रणनीतियों को एकीकृत करना, प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली विकसित करना, मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र को बहाल करना और सभी तटीय राज्यों में लचीले बुनियादी ढांचे का निर्माण करना है। यह सामुदायिक भागीदारी और सतत संसाधन प्रबंधन पर जोर देता है। प्रभाव: इस मिशन से तटीय खतरों के खिलाफ भारत की तैयारी में उल्लेखनीय वृद्धि होने, कमजोर समुदायों की रक्षा करने और महत्वपूर्ण तटीय जैव विविधता को सुरक्षित रखने की उम्मीद है। यह जलवायु कार्रवाई और जलीय जीवन से संबंधित सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में भी योगदान देगा, जिससे एक अधिक सुरक्षित और पारिस्थितिक रूप से संतुलित तटीय भविष्य का निर्माण होगा।
पश्चिमी घाट में उभयचर विविधता में गिरावट पर नई रिपोर्ट
2026-06-19पृष्ठभूमि: पश्चिमी घाट, एक यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल और वैश्विक जैव विविधता हॉटस्पॉट, अपनी अद्वितीय उभयचर प्रजातियों के लिए प्रसिद्ध है, जिनमें से कई स्थानिक हैं। हालांकि, आवास हानि, जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण ने महत्वपूर्ण खतरे पैदा किए हैं। वर्तमान संदर्भ: भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (ZSI) द्वारा 17 जून, 2026 को जारी एक व्यापक रिपोर्ट में पिछले दशक में पश्चिमी घाट के प्रमुख क्षेत्रों में उभयचर आबादी में चिंताजनक 15% की गिरावट का खुलासा हुआ है। अध्ययन इस गिरावट का मुख्य कारण वनों की कटाई, कृषि क्षेत्रों में कीटनाशकों का उपयोग और वर्षा के बदलते पैटर्न को बताता है। प्रभाव: यह रिपोर्ट पर्यावरण नियमों के सख्त प्रवर्तन, पर्यावरण-अनुकूल कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने और अधिक संरक्षित क्षेत्रों की स्थापना सहित उन्नत संरक्षण प्रयासों की तत्काल आवश्यकता पर जोर देती है। यह इस महत्वपूर्ण जैव विविधता के आगे अपरिवर्तनीय नुकसान को रोकने के लिए तत्काल नीतिगत हस्तक्षेप का आह्वान करती है।