भारत ने राष्ट्रीय मैंग्रोव बहाली मिशन 2026 का शुभारंभ किया
2026-06-17पृष्ठभूमि: मैंग्रोव महत्वपूर्ण तटीय पारिस्थितिक तंत्र हैं जो प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षा प्रदान करते हैं और समृद्ध जैव विविधता का समर्थन करते हैं। भारत को विकासात्मक दबावों और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के कारण अपने मैंग्रोव आवरण को संरक्षित करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। वर्तमान संदर्भ: पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने आधिकारिक तौर पर 'राष्ट्रीय मैंग्रोव बहाली मिशन 2026' का शुभारंभ किया है। इस महत्वाकांक्षी पहल का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में विभिन्न तटीय राज्यों में 10,000 हेक्टेयर खराब हुए मैंग्रोव वनों को बहाल करना है, जिसमें उन्नत उपग्रह निगरानी और स्थानीय समुदाय की भागीदारी को एकीकृत किया जाएगा। प्रभाव: यह मिशन भारत के तटीय लचीलेपन को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाएगा, कमजोर पारिस्थितिक तंत्रों की रक्षा करेगा और जैव विविधता संरक्षण में योगदान देगा। यह तटीय समुदायों की आजीविका का भी समर्थन करता है और भारत की राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय जलवायु कार्रवाई प्रतिबद्धताओं के अनुरूप है।
सरकार ने ई-कचरा प्रबंधन नीति फ्रेमवर्क 2.0 का अनावरण किया
2026-06-17पृष्ठभूमि: भारत में तेजी से तकनीकी प्रगति के कारण इलेक्ट्रॉनिक कचरे (ई-कचरा) में काफी वृद्धि हुई है, जिससे अनुचित निपटान के कारण महत्वपूर्ण पर्यावरणीय और स्वास्थ्य जोखिम पैदा हो रहे हैं। बढ़ती चुनौती से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए मौजूदा नियमों में व्यापक अपडेट की आवश्यकता थी। वर्तमान संदर्भ: सरकार ने 'ई-कचरा प्रबंधन नीति फ्रेमवर्क 2.0' पेश किया है, जो एक संशोधित और मजबूत नीति है। यह विस्तारित उत्पादक जिम्मेदारी (ईपीआर) मानदंडों को सख्त करता है, औपचारिक रीसाइक्लिंग इकाइयों की स्थापना और संचालन को प्रोत्साहित करता है, और ई-कचरे के लिए एक डिजिटल ट्रैकिंग प्रणाली लागू करता है। यह फ्रेमवर्क इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में चक्रीय अर्थव्यवस्था सिद्धांतों को बढ़ावा देने पर भी जोर देता है। प्रभाव: इस अद्यतन नीति से ई-कचरा संग्रह और रीसाइक्लिंग दरों में उल्लेखनीय सुधार होने, खतरनाक सामग्रियों से होने वाले पर्यावरणीय प्रदूषण को कम करने और अधिक टिकाऊ इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। यह औपचारिक रीसाइक्लिंग क्षेत्र में नए हरित रोजगार के अवसर भी पैदा करेगा।