भारत ने राष्ट्रीय मैंग्रोव बहाली पहल शुरू की
2026-06-13पृष्ठभूमि: मैंग्रोव महत्वपूर्ण तटीय पारिस्थितिकी तंत्र हैं, जो तूफानों से सुरक्षा प्रदान करते हैं, कटाव को रोकते हैं और समुद्री जीवन के लिए नर्सरी का काम करते हैं। भारत में महत्वपूर्ण मैंग्रोव आवरण है, लेकिन यह विकास और जलवायु परिवर्तन से खतरों का सामना करता है। वर्तमान संदर्भ: पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने 10 जून, 2026 को एक व्यापक "राष्ट्रीय मैंग्रोव बहाली पहल" शुरू की है। इस बहु-राज्य कार्यक्रम का उद्देश्य सामुदायिक भागीदारी और उन्नत पारिस्थितिक तकनीकों के माध्यम से degraded मैंग्रोव वनों को बहाल करना और मौजूदा आवरण का विस्तार करना है। इसमें अनुसंधान और क्षमता निर्माण के लिए धन शामिल है। प्रभाव: इस पहल से तटीय लचीलेपन में उल्लेखनीय वृद्धि, जैव विविधता की सुरक्षा और मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र पर निर्भर तटीय समुदायों की आजीविका में सुधार की उम्मीद है। यह भारत के जलवायु परिवर्तन अनुकूलन लक्ष्यों और कार्बन पृथक्करण प्रयासों में भी योगदान देगा, जो अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं के अनुरूप है।
रिपोर्ट में हिमालयी ग्लेशियरों के alarming पिघलने और जल सुरक्षा खतरों पर प्रकाश डाला गया
2026-06-13पृष्ठभूमि: हिमालयी ग्लेशियर प्रमुख एशियाई नदियों के लिए एक महत्वपूर्ण जल स्रोत हैं, जो अरबों लोगों का समर्थन करते हैं। जलवायु परिवर्तन ने उनके पिघलने की गति को तेज कर दिया है, जिससे क्षेत्रीय जल सुरक्षा और पारिस्थितिकी तंत्र के लिए दीर्घकालिक खतरे पैदा हो गए हैं। वर्तमान संदर्भ: वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी (WIHG) द्वारा 12 जून, 2026 को जारी एक हालिया रिपोर्ट में कई प्रमुख हिमालयी ग्लेशियरों के पिघलने की alarming दर पर प्रकाश डाला गया है। रिपोर्ट में 2050 तक निचले इलाकों के लिए पानी की उपलब्धता में महत्वपूर्ण कमी का अनुमान लगाया गया है, जो मजबूत जल प्रबंधन रणनीतियों और जलवायु कार्रवाई की तत्काल आवश्यकता पर जोर देता है। प्रभाव: निष्कर्ष भारत और पड़ोसी देशों में कृषि, जलविद्युत उत्पादन और पेयजल आपूर्ति के लिए गंभीर प्रभावों को रेखांकित करते हैं। यह भविष्य की जल सुरक्षा को बनाए रखने के लिए सीमा पार जल संसाधनों पर क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने और जलवायु परिवर्तन शमन और अनुकूलन में त्वरित प्रयासों का आह्वान करता है।