भारत ने राष्ट्रीय तटीय लचीलापन मिशन शुरू किया
2026-06-12पृष्ठभूमि: भारत की विशाल तटरेखा समुद्र-स्तर में वृद्धि, चरम मौसमी घटनाओं और तटीय कटाव जैसे जलवायु परिवर्तन प्रभावों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है, जिससे आजीविका और पारिस्थितिकी तंत्र खतरे में हैं। मौजूदा प्रयास खंडित हैं। वर्तमान संदर्भ: 10 जून, 2026 को पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने "राष्ट्रीय तटीय लचीलापन मिशन" (NCRM) का शुभारंभ किया। इस बहु-हितधारक पहल का उद्देश्य सभी तटीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में स्थायी बुनियादी ढांचे और प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों के माध्यम से जलवायु अनुकूलन रणनीतियों को एकीकृत करना, तटीय जैव विविधता की रक्षा करना और सामुदायिक तैयारी को बढ़ाना है। प्रभाव: NCRM से तटीय खतरों से होने वाले आर्थिक नुकसान को काफी कम करने, मैंग्रोव और प्रवाल भित्तियों जैसे महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्रों की सुरक्षा करने और लाखों तटीय निवासियों की अनुकूलन क्षमता में सुधार करने की उम्मीद है, जिससे भारत के सतत विकास लक्ष्यों और जलवायु प्रतिबद्धताओं में योगदान मिलेगा।
ई-कचरा प्रबंधन नियम 2.0 लागू
2026-06-12पृष्ठभूमि: भारत सालाना बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक कचरा (ई-कचरा) उत्पन्न करता है, जिससे अनुचित निपटान और पुनर्चक्रण प्रथाओं के कारण गंभीर पर्यावरणीय और स्वास्थ्य जोखिम पैदा होते हैं। पिछले नियमों को प्रवर्तन और संग्रह लक्ष्यों में चुनौतियों का सामना करना पड़ा था। वर्तमान संदर्भ: 1 जून, 2026 से पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने संशोधित "ई-कचरा प्रबंधन नियम 2.0" लागू किए। ये नए नियम सख्त विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) लक्ष्य पेश करते हैं, उन्नत पुनर्चक्रण प्रौद्योगिकियों को अनिवार्य करते हैं, और ई-कचरे को उत्पादन से निपटान तक ट्रैक करने के लिए एक मजबूत डिजिटल प्लेटफॉर्म स्थापित करते हैं, जिसका लक्ष्य चक्रीय अर्थव्यवस्था दृष्टिकोण है। प्रभाव: अद्यतन नियमों से औपचारिक ई-कचरा पुनर्चक्रण बुनियादी ढांचे को बढ़ावा मिलने, हरित रोजगार सृजित होने, लैंडफिल में खतरनाक कचरे को कम करने और जिम्मेदार उपभोग व उत्पादन पैटर्न को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जो सतत संसाधन प्रबंधन के वैश्विक प्रयासों के अनुरूप है।