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पर्यावरण और पारिस्थितिकी समसामयिकी: जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता, संरक्षण

मरुस्थलीकरण और भूमि क्षरण से निपटने के लिए भारत की प्रतिबद्धता
2026-06-08
पृष्ठभूमि: मरुस्थलीकरण और भूमि क्षरण महत्वपूर्ण पर्यावरणीय चुनौतियाँ हैं जो भारत के बड़े हिस्सों को प्रभावित करती हैं, जिससे कृषि, जैव विविधता और आजीविका पर असर पड़ता है। भारत इन मुद्दों को हल करने के वैश्विक प्रयासों में सक्रिय रूप से भाग ले रहा है। वर्तमान संदर्भ: भारत ने हाल ही में एक अंतरराष्ट्रीय मंच पर मरुस्थलीकरण और भूमि क्षरण से निपटने के प्रति अपनी मजबूत प्रतिबद्धता दोहराई, जिसमें एकीकृत भूमि प्रबंधन रणनीतियों और सामुदायिक भागीदारी की आवश्यकता पर जोर दिया गया। देश ग्रेट ग्रीन वॉल परियोजना जैसी विभिन्न पहलों के माध्यम से क्षरित भूमि को बहाल करने और टिकाऊ भूमि उपयोग प्रथाओं को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। प्रभाव: इन प्रयासों का उद्देश्य पारिस्थितिक लचीलापन बढ़ाना, मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार करना, कृषि उत्पादकता बढ़ाना और जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों को कम करना है। सफल कार्यान्वयन से ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं और खाद्य सुरक्षा में महत्वपूर्ण सुधार हो सकता है।
समुद्री हीटवेव में वृद्धि से वैश्विक स्तर पर प्रवाल भित्तियों को खतरा
2026-06-08
पृष्ठभूमि: प्रवाल भित्तियाँ महत्वपूर्ण समुद्री पारिस्थितिक तंत्र हैं, जो सभी समुद्री जीवन के एक चौथाई हिस्से का समर्थन करती हैं और महत्वपूर्ण तटीय सुरक्षा और आर्थिक लाभ प्रदान करती हैं। वे समुद्री तापमान में परिवर्तन के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हैं। वर्तमान संदर्भ: वैज्ञानिकों ने विश्व स्तर पर समुद्री हीटवेव की आवृत्ति और तीव्रता में उल्लेखनीय वृद्धि देखी है। असामान्य रूप से उच्च समुद्री सतह के तापमान की ये लंबी अवधि ग्रेट बैरियर रीफ और हिंद महासागर जैसे क्षेत्रों में प्रवाल भित्तियों के क्षरण और मृत्यु का कारण बन रही है, जिससे व्यापक कोरल ब्लीचिंग की घटनाएँ हो रही हैं। प्रभाव: प्रवाल भित्तियों के पतन के समुद्री जैव विविधता, मत्स्य पालन, पर्यटन और तटीय समुदायों के लिए विनाशकारी परिणाम होते हैं। यह तटीय कटाव को बढ़ाता है और तूफान की लहरों के खिलाफ प्राकृतिक सुरक्षा को कम करता है, जिससे जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति भेद्यता बढ़ जाती है।
नए अध्ययन में स्थलीय पारिस्थितिक तंत्र पर माइक्रोप्लास्टिक के प्रभाव पर प्रकाश डाला गया
2026-06-08
पृष्ठभूमि: माइक्रोप्लास्टिक, 5 मिमी से छोटे प्लास्टिक कण, समुद्री वातावरण में एक प्रमुख प्रदूषक के रूप में व्यापक रूप से पहचाने गए हैं। भूमि-आधारित पारिस्थितिक तंत्र पर उनकी उपस्थिति और प्रभाव का तेजी से अध्ययन किया जा रहा है। वर्तमान संदर्भ: एक हालिया अध्ययन में विभिन्न कृषि और प्राकृतिक परिदृश्यों में मिट्टी में माइक्रोप्लास्टिक की व्यापक उपस्थिति का खुलासा हुआ है। शोध से पता चलता है कि ये कण मिट्टी की संरचना को बदल सकते हैं, सूक्ष्मजीव समुदायों को प्रभावित कर सकते हैं, और पौधों द्वारा अवशोषित किए जा सकते हैं, जिससे संभावित रूप से खाद्य श्रृंखला में प्रवेश हो सकता है। प्रभाव: निष्कर्ष स्थलीय पारिस्थितिक तंत्र के दीर्घकालिक स्वास्थ्य और कृषि उत्पादकता के बारे में चिंताएं बढ़ाते हैं। इस उभरते पर्यावरणीय खतरे को कम करने के लिए रणनीतियों को विकसित करने हेतु मिट्टी में माइक्रोप्लास्टिक संदूषण के मार्गों और प्रभावों को समझना महत्वपूर्ण है।
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