भारत ने महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय मैंग्रोव संरक्षण योजना 2026-2030 का शुभारंभ किया
2026-06-07पृष्ठभूमि: मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र तटीय सुरक्षा, जैव विविधता और कार्बन पृथक्करण के लिए महत्वपूर्ण हैं। भारत, अपनी समृद्ध मैंग्रोव विरासत के साथ, संरक्षण में सक्रिय रूप से शामिल रहा है, लेकिन ये क्षेत्र जलवायु परिवर्तन और मानवीय गतिविधियों से खतरे में हैं। वर्तमान संदर्भ: पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने "राष्ट्रीय मैंग्रोव संरक्षण और बहाली योजना 2026-2030" का अनावरण किया है। यह पांच वर्षीय पहल सामुदायिक भागीदारी, उन्नत उपग्रह निगरानी और तटीय राज्यों में जलवायु-लचीली मैंग्रोव प्रजातियों के प्रसार पर जोर देती है। प्रभाव: इस योजना का लक्ष्य 2030 तक भारत के मैंग्रोव आवरण को 15% तक बढ़ाना है, जिससे चरम मौसमी घटनाओं के खिलाफ तटीय लचीलापन काफी बढ़ जाएगा। यह स्थायी इकोटूरिज्म और मत्स्य पालन के माध्यम से स्थानीय आजीविका को भी मजबूत करेगा, जो भारत के जलवायु कार्रवाई लक्ष्यों में योगदान देगा।
वैश्विक रिपोर्ट में हिमालयी ग्लेशियरों के पिघलने की दर में चिंताजनक तेजी पर प्रकाश डाला गया
2026-06-07पृष्ठभूमि: हिमालयी ग्लेशियर महत्वपूर्ण मीठे पानी के भंडार हैं, जो एशिया भर की प्रमुख नदियों को पोषित करते हैं और अरबों लोगों का समर्थन करते हैं। वैज्ञानिक लंबे समय से ग्लोबल वार्मिंग के कारण उनके पीछे हटने की निगरानी कर रहे हैं, लेकिन हालिया डेटा अधिक तेजी से गिरावट का संकेत देता है। वर्तमान संदर्भ: भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) सहित प्रमुख अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक संगठनों की एक सहयोगी रिपोर्ट में पिछले दशक में हिमालयी ग्लेशियरों के पिघलने में अभूतपूर्व तेजी का खुलासा हुआ है। अध्ययन इस वृद्धि का श्रेय बढ़ते क्षेत्रीय तापमान और ब्लैक कार्बन के बढ़ते जमाव को देता है। प्रभाव: यह त्वरित पिघलना निचले क्षेत्रों में अरबों लोगों के लिए जल सुरक्षा के लिए गंभीर दीर्घकालिक खतरा पैदा करता है, जिससे कृषि और जलविद्युत प्रभावित होती है। निष्कर्ष आगामी जल संकट को कम करने के लिए वैश्विक जलवायु कार्रवाई और क्षेत्रीय अनुकूलन रणनीतियों की तत्काल आवश्यकता पर जोर देते हैं।