भारत ने नई राष्ट्रीय आर्द्रभूमि संरक्षण नीति शुरू की
2026-06-01पृष्ठभूमि: आर्द्रभूमियाँ महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र हैं जो जल शुद्धिकरण, बाढ़ नियंत्रण और जैव विविधता सहायता जैसी महत्वपूर्ण सेवाएँ प्रदान करती हैं, फिर भी वे गंभीर क्षरण के खतरों का सामना करती हैं। रामसर कन्वेंशन का एक हस्ताक्षरकर्ता होने के नाते, भारत उनके संरक्षण की दिशा में काम कर रहा है। वर्तमान संदर्भ: पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने एक नई व्यापक राष्ट्रीय आर्द्रभूमि संरक्षण नीति की घोषणा की है। यह नीति एकीकृत प्रबंधन, सामुदायिक भागीदारी और सतत उपयोग पर जोर देती है, जिसमें 2030 तक आर्द्रभूमि बहाली और संरक्षण के लिए विशिष्ट लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। प्रभाव: इस ऐतिहासिक नीति से भारत की विविध आर्द्रभूमियों की संरक्षण स्थिति में उल्लेखनीय वृद्धि होने, पारिस्थितिक स्वास्थ्य में सुधार होने, इन पारिस्थितिकी तंत्रों पर निर्भर स्थानीय आजीविका का समर्थन करने और देश के जलवायु लचीलेपन के प्रयासों को मजबूत करने की उम्मीद है।
रिपोर्ट में हिमालयी ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने का खुलासा
2026-06-01पृष्ठभूमि: हिमालयी ग्लेशियर एशिया भर में लाखों लोगों के लिए महत्वपूर्ण मीठे पानी के स्रोत हैं, लेकिन वे ग्लोबल वार्मिंग के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हैं। पिछले वैज्ञानिक अध्ययनों ने दशकों से इन बर्फ द्रव्यमानों के महत्वपूर्ण रूप से पिघलने का लगातार संकेत दिया है। वर्तमान संदर्भ: भारतीय वैज्ञानिक संस्थानों के एक प्रमुख संघ द्वारा प्रकाशित एक नई रिपोर्ट में पिछले पाँच वर्षों में कई प्रमुख हिमालयी ग्लेशियरों के पिघलने की दर में खतरनाक तेजी का खुलासा हुआ है। निष्कर्ष बताते हैं कि पिघलने की दर ने पिछली भविष्यवाणियों को पार कर लिया है, जिससे पिघले हुए पानी का बहाव बढ़ गया है और दीर्घकालिक जल सुरक्षा के बारे में चिंताएँ बढ़ गई हैं। प्रभाव: इस त्वरित पिघलने के लिए जल संसाधन प्रबंधन, निचले इलाकों में आपदा तैयारियों को बढ़ाने और वैश्विक जलवायु परिवर्तन शमन रणनीतियों की दिशा में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों को तेज करने के लिए तत्काल नीतिगत हस्तक्षेप की आवश्यकता है।