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पर्यावरण और पारिस्थितिकी समसामयिकी - भारत और विश्व | UPSC, SSC, बैंकिंग

जलवायु लचीलापन और अनुकूलन के प्रति भारत की प्रतिबद्धता
2026-05-23
पृष्ठभूमि: भारत ने पेरिस समझौते के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं के अनुरूप, जलवायु कार्रवाई और अनुकूलन की आवश्यकता पर लगातार जोर दिया है। देश अपनी लंबी तटरेखा और कृषि पर निर्भरता के कारण महत्वपूर्ण कमजोरियों का सामना करता है। वर्तमान संदर्भ: हालिया रिपोर्टें विभिन्न राष्ट्रीय मिशनों और राज्य-स्तरीय कार्य योजनाओं के माध्यम से जलवायु लचीलापन बढ़ाने के भारत के चल रहे प्रयासों पर प्रकाश डालती हैं। इनमें नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देना, जलवायु-स्मार्ट कृषि पद्धतियों का विकास करना और चरम मौसम की घटनाओं के लिए प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों को मजबूत करना शामिल है। प्रभाव: इन पहलों का उद्देश्य जलवायु परिवर्तन के सामाजिक-आर्थिक प्रभाव को कम करना, कमजोर समुदायों की रक्षा करना और सतत विकास पथ सुनिश्चित करना है, जिससे भारत वैश्विक जलवायु अनुकूलन रणनीतियों में एक अग्रणी के रूप में स्थापित हो सके।
पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली पर राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण का ध्यान
2026-05-23
पृष्ठभूमि: राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) जैविक विविधता पर कन्वेंशन के तहत भारत की प्रतिबद्धताओं को लागू करने के लिए 2002 के जैविक विविधता अधिनियम के तहत स्थापित एक वैधानिक निकाय है। वर्तमान संदर्भ: एनबीए ने हाल ही में भारत में विभिन्न निम्नीकृत परिदृश्यों में पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली की दिशा में अपने प्रयासों को तेज किया है। इसमें सामुदायिक भागीदारी, वैज्ञानिक हस्तक्षेप और पारिस्थितिक कार्यों और जैव विविधता हॉटस्पॉट को पुनर्जीवित करने के लिए देशी प्रजातियों को बढ़ावा देना शामिल है। प्रभाव: पारिस्थितिकी तंत्र की सफल बहाली न केवल जैव विविधता और पारिस्थितिक सेवाओं को बढ़ाएगी, बल्कि कार्बन पृथक्करण में भी योगदान देगी, जल सुरक्षा में सुधार करेगी, और स्थानीय समुदायों के लिए आजीविका के अवसर पैदा करेगी, जिससे भारत के व्यापक पर्यावरणीय और विकासात्मक लक्ष्यों का समर्थन होगा।
भारत में आर्द्रभूमियों के सतत प्रबंधन के लिए पहल
2026-05-23
पृष्ठभूमि: आर्द्रभूमियाँ महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र हैं जो महत्वपूर्ण सेवाएँ प्रदान करती हैं, लेकिन वे मानवीय गतिविधियों और जलवायु परिवर्तन से बढ़ते खतरे में हैं। भारत आर्द्रभूमियों पर रामसर कन्वेंशन का हस्ताक्षरकर्ता है। वर्तमान संदर्भ: पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, राज्य सरकारों के साथ मिलकर, भारत की आर्द्रभूमियों के सतत प्रबंधन को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रहा है। हाल की पहलों में एकीकृत प्रबंधन योजनाओं का विकास, स्थानीय समुदायों को शामिल करना और निगरानी और संरक्षण के लिए वैज्ञानिक उपकरणों का उपयोग करना शामिल है। प्रभाव: ये प्रयास आर्द्रभूमियों की अनूठी जैव विविधता के संरक्षण, जल संसाधन प्रबंधन सुनिश्चित करने, बाढ़ और सूखे को कम करने और इन पारिस्थितिक तंत्रों पर निर्भर समुदायों की आजीविका का समर्थन करने के लिए महत्वपूर्ण हैं। यह रामसर कन्वेंशन के तहत भारत के अंतर्राष्ट्रीय दायित्वों के साथ भी संरेखित है।
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