राष्ट्रीय मैंग्रोव बहाली पहल का शुभारंभ
2026-05-11पृष्ठभूमि: मैंग्रोव महत्वपूर्ण तटीय पारिस्थितिकी तंत्र हैं जो प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षा प्रदान करते हैं, कटाव को रोकते हैं और विविध समुद्री जीवन के लिए महत्वपूर्ण आवास के रूप में कार्य करते हैं। भारत इनकी सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहा है। वर्तमान संदर्भ: पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने भारत के मैंग्रोव आवरण को बहाल करने और महत्वपूर्ण रूप से विस्तारित करने के उद्देश्य से एक नई राष्ट्रव्यापी पहल, "हरित तट रक्षक अभियान" शुरू की है। इस बहु-वर्षीय परियोजना का लक्ष्य 2030 तक नौ तटीय राज्यों और चार केंद्र शासित प्रदेशों में 50 मिलियन नए मैंग्रोव पौधे लगाना है। प्रभाव: यह पहल तटीय लचीलेपन को मजबूत करेगी, कमजोर समुदायों को चरम मौसमी घटनाओं से बचाएगी, समुद्री जैव विविधता को बढ़ाएगी और भारत के कार्बन पृथक्करण प्रयासों में महत्वपूर्ण योगदान देगी, जो इसकी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय जलवायु प्रतिबद्धताओं के अनुरूप है।
प्रोजेक्ट टाइगर ने 50वीं वर्षगांठ के लक्ष्यों की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति दिखाई
2026-05-11पृष्ठभूमि: भारत का प्रमुख बाघ संरक्षण कार्यक्रम, प्रोजेक्ट टाइगर, जिसे 1973 में शुरू किया गया था, ने 2023 में अपनी 50वीं वर्षगांठ मनाई थी, जिसमें जनसंख्या वृद्धि और आवास विस्तार के लिए महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किए गए थे। वर्तमान संदर्भ: मई 2026 में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) द्वारा जारी एक मध्य-अवधि समीक्षा रिपोर्ट इन उद्देश्यों की दिशा में पर्याप्त प्रगति का संकेत देती है। रिपोर्ट कई प्रमुख अभयारण्यों में बाघों की आबादी में लगातार वृद्धि और विशेष रूप से मध्य भारतीय परिदृश्य में वन्यजीव गलियारे के विकास के सफल कार्यान्वयन पर प्रकाश डालती है। हालांकि मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं, शमन रणनीतियां सकारात्मक परिणाम दिखा रही हैं। प्रभाव: यह प्रगति बाघ संरक्षण में भारत के वैश्विक नेतृत्व को मजबूत करती है, समग्र जैव विविधता को बढ़ाती है, और महत्वपूर्ण वन पारिस्थितिकी तंत्रों के पारिस्थितिक स्वास्थ्य को सुनिश्चित करती है, जिससे व्यापक पर्यावरणीय स्थिरता में योगदान मिलता है।
भारत ने राष्ट्रीय ई-कचरा और चक्रीय अर्थव्यवस्था नीति 2026 का अनावरण किया
2026-05-11पृष्ठभूमि: भारत इलेक्ट्रॉनिक कचरे (ई-कचरा) से बढ़ती चुनौती का सामना कर रहा है, जिसमें अनुचित निपटान से पर्यावरणीय प्रदूषण और मूल्यवान संसाधनों का नुकसान होता है। चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए मौजूदा नियमों को मजबूत करने की आवश्यकता थी। वर्तमान संदर्भ: सरकार ने व्यापक "राष्ट्रीय ई-कचरा और चक्रीय अर्थव्यवस्था नीति 2026" पेश की है। यह ऐतिहासिक नीति बढ़ी हुई संग्रह लक्ष्यों के साथ सख्त विस्तारित उत्पादक जिम्मेदारी (ईपीआर) को अनिवार्य करती है, औपचारिक रीसाइक्लिंग बुनियादी ढांचे के विकास को प्रोत्साहित करती है, और स्थायित्व, मरम्मत क्षमता और पुनर्चक्रण क्षमता के लिए उत्पाद डिजाइन को बढ़ावा देती है। इसमें कौशल विकास और जागरूकता अभियानों के प्रावधान भी शामिल हैं। प्रभाव: इस नीति का उद्देश्य भारत के ई-कचरा रीसाइक्लिंग क्षेत्र को औपचारिक बनाना, खतरनाक सामग्रियों से होने वाले पर्यावरणीय संदूषण को काफी कम करना, कुशल सामग्री पुनर्प्राप्ति के माध्यम से महत्वपूर्ण संसाधनों का संरक्षण करना और हरित रोजगार सृजित करना है, जिससे एक अधिक टिकाऊ और चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।